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श्रीकल्प
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भगवतो
व्यवस्थायुक्त 'इदमेवं करिष्यामि'-इति कार्याकारेण परिणतो विचारः पल्लवित इव, प्रार्थितः स एवेष्टरूपेण स्वीकृतः पुष्पित इव मनोगता मनसि दृढरूपेण स्थितः संकल्प: 'इत्यमेव मया कर्त्तव्यम्' इति निश्चितो विचारः फलित इव समुदपद्यत-समुत्पन्नः, यत्प्रभृतिन्यस्माद् दिनादारभ्य खलु अस्माकम् एष दारका बालकः कुक्षौ गर्भतया अवक्रान्तः समुत्पन्नः, तत्प्रभृति-तस्मादिनादारभ्य च खलु वयं हिरण्येन वर्धामहे 'यावत् ' पदेन 'सुवर्णेन धनेन धान्येन विभवेन ऐश्वर्येण ऋद्ध्या सिद्ध्या समृद्ध्या सत्कारेण सम्मानेन पुरस्कारेण बलेन वाहनेन कोषेण कोष्ठागारेण पुरेण अन्तःपुरेण जनपदेन यशोवादेन कीर्तिवादेन स्तुतिवादेन च विपुल-धन कनक-रत्न-मणि-मौक्तिक-शङ्क-शिलाप्रवाल-रक्तरत्नादिकेन सत्सारस्वापतेयेन' इत्येषां संग्रहः, तथा-प्रीतिसत्कारसमुदयेन च अतीवातीव-अधिकाधिकं वर्धामहे, तत्-तस्माद्धेतोः खलु यदा यस्मिन् काले खलु अस्माकम् के समान पुनः पुनः स्मरण रूप विचार, फिर कल्पित अर्थात् पल्लवित के समान सा करेंगे इस प्रकार का व्यवस्थायुक्त कार्य-परिणत करने योग्य विचार, प्रार्थित अर्थात् फुले हुए के समान इष्टरूप में स्वीकृत विचार, मनोगत-मन में दृढ़ रूप से स्थित विचार, तथा संकल्प अर्थात् फलित के समान 'ऐसा ही मुझे करना चाहिये' ऐसा निश्चित विचार उत्पन्न हुआ कि जिस दिन से लेकर हमारा यह बालक उदर में गर्भरूप से उत्पन्न हुआ है, उसी दिन से लेकर हम हिरण्य से यावत् प्रीति और सत्कार की प्राप्ति से खूब खूब बढ़ रहे हैं। यहाँ 'यावत्' शब्द से सुवर्ण, धन, धान्य, विभव, ऐश्वर्य, ऋद्धि. सिद्धि, समृद्धि, सत्कार, सम्मान, पुरस्कार, बल, वाहन, कोष, धान्यभंडार, पुर, अन्तःपुर, जनपद, यशोवाद, कीर्तिवाद, स्तुतिवाद, विपुल धन, स्वर्ण, रत्न, मणि, मोती, शंख, मूंगा, लाल तथा विद्यमान उत्तम द्रव्य का ग्रहण कर लेना
સ્મરણરૂપ વિચાર, વળી કલ્પિત એટલે કે પલવિતના જે “આમ કરશું” આ પ્રકારને વ્યવસ્થાપૂર્વક કાર્ય-પરિત કરવા લાયક વિચાર, પ્રાર્થિત એટલે કે વિકસિતના જેમ ઈષ્ટરૂપમાં સ્વીકૃત વિચાર, મગત-મનમાં દઢતાથી રહેલ વિચાર, તથા સંક૯પ એટલે કે ફલિતની જેમ “એવું જ મારે કરવું જોઈએ” એ નિશ્ચિત વિચાર ઉત્પન્ન થયો, કે જે દિવસે અમારે આ બાળક ઉદરમાં ગર્ભરૂપે ઉત્પન્ન થયે છે, ત્યારથી શરૂ કરીને અમે હિરણ્યની યાવત્ પ્રીતિ અને સત્કારની પ્રાપ્તિમાં ખૂબ-ખૂબ વધારે પામી રહ્યાં છીએ. અહીં વાત શબ્દથી સુવર્ણ, ધન, धान्य, वैभव, अश्व, ऋद्धि, सिla, ४२, सम्मान, पु२२७१२, , पान, प, धान्या२, पुर, मतपुर, बन५४, यशपाई, तिवा, स्तुतिवाह, विपुल बन, सुपर्ष, २ल, भलि, मोती, , ५२१, ala,
'वर्द्धमान'. इतिनाम
करणार्थ म तन्माताa. पित्रोः
संकल्प:।'
CAREJESTATALAB
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