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________________ ७३६ ] छक्खंडागमे वग्गणा-खंड [ ५, ३, १०३ आठप्रदेशी, नौप्रदेशी, दसप्रदेशी, संख्यातप्रदेशी, असंख्यातप्रदेशी, परीतप्रदेशी, अपरीतप्रदेशी, अनन्तप्रदेशी और अनन्तानन्तप्रदेशी परमाणुपुद्गलद्रव्यवर्गणा क्या भेदसे होती है, क्या संघातसे होती है, या क्या भेद-संघातसे होती है ? ॥ १०२ ॥ उवरिल्लीणं दव्वाणं भेदेण हेडिल्लीणं दव्वाणं संघादेण सत्थाणेण भेद-संघादेण ।। वह त्रिप्रदेशिक पुद्गलद्रव्यवर्गणा ऊपरके द्रव्योंके भेदसे, नीचेके द्रव्योंके संघातसे और स्वस्थानकी अपेक्षा भेद-संघातसे होती है ॥ १०३ ॥ आहार-अगहण-तेया-अगहण-भासा-अगहण-मण - अगहण-कम्मइय - धुवक्खंधदव्यवग्गणा णाम किं भेदेण किं संघादेण किं भेदसंघादेण ? ॥ १०४ ॥ आहारद्रव्यवर्गणा, अग्रहणद्रव्यवर्गणा, तैजसद्रव्यवर्गणा, अग्रहणद्रव्यवर्गणा, भाषाद्रव्यवर्गणा, अग्रहणद्रव्यवर्गणा, मनोद्रव्यवर्गणा, अग्रहणद्रव्यवर्गणा, कार्मणद्रव्यवर्गणा और ध्रुवस्कन्धद्रव्यवर्गणा ये क्या भेदसे होती हैं, क्या संवातसे होती हैं, या क्या भेद-संघातसे होती हैं ? ॥ १०४ ॥ उवरिल्लीणं दवाणं भेदेण हेडिल्लीणं दव्वाणं संघादेण सत्थाणेण भेदसंघादेण ॥ वे ऊपरके द्रव्योंके भेदसे, नीचेके द्रव्योंके संघातसे और स्वस्थानकी अपेक्षा भेदसंघातसे होती हैं । १०५ ॥ धुव्वखंघदव्यवग्गणाणमुवरि सांतर-णिरंतरदव्यवग्गणा णाम किं भेदेण किं संघादेण किं भेदसंघादेण ? ॥ १०६ ॥ ध्रुवस्कन्धद्रव्यवर्गणाओंके ऊपर सान्तर-निरन्तरद्रव्यवर्गणा क्या भेदसे होती है, क्या संघातसे होती है, या क्या भेद-संघातसे होती है ? ॥ १०६ ॥ सत्थाणेण भेदसंघादेण ॥ १०७॥ वह स्वस्थानकी अपेक्षा भेद-संघातसे होती है ॥ १०७ ॥ उवरिल्लीणं दव्वाणं भेदेण हेद्विल्लीणं दव्याणं संपादण सत्थाणेण भेदसंघादेण ॥ वह ऊपरके द्रव्योंके भेदसे, नीचेके द्रव्योंके संघातसे और स्वस्थानकी अपेक्षा भेद संघातसे होती है ॥ १०८ ॥ सांतर-निरंतरदव्ववग्गणाणमुवरि पत्तेयसरीरदव्ववग्गणा णाम किं भेदेण किं संघादेण किं भेदसंघादेण १ ॥ १०९ ॥ वह सान्तर-निरन्तरद्रव्यवर्गणाओंके ऊपर प्रत्येकशरीरद्रव्यवर्गणा क्या संघातसे होती है या क्या भेद-संघातसे होती है ? ॥ १०९ ।। सत्थाणेण भेद-संघादेण ॥११० ॥ वह स्वस्थानकी अपेक्षा भेद-संघातसे होती है ॥ ११० ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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