SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 781
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ६५६ ] छक्खंडागमे वेयणाखंड [ ४, २, १३, २४ जस्स णाणावरणीयवेयणा कालदो उक्कस्सा तस्स दव्वदो किमुक्कस्सा अणुक्कस्सा ! ।। २४ ॥ जिस जीवके ज्ञानावरणीयकी वेदना कालकी अपेक्षा उत्कृष्ट है उसके वह द्रव्यकी अपेक्षा क्या उत्कृष्ट होती है या अनुत्कृष्ट ! ॥ २४ ॥ उक्कस्सा वा अणुक्कस्सा वा ॥ २५ ॥ उसके द्रव्यकी अपेक्षा वह उत्कृष्ट भी होती है और अनुत्कृष्ट भी होती है ॥ २५ ॥ aratसादो अणुक्कस्सा पंचट्ठाणपदिदा || २६ ॥ यह अनुत्कृष्ट वेदना उत्कृष्टकी अपेक्षा अनन्तगुणहानिसे रहित शेष पांच स्थानोंमें पतित है ॥ २६ ॥ तस्स खेत्तदो किमुक्कस्सा अणुक्कस्सा ।। २७ ।। उसके क्षेत्रकी अपेक्षा उक्त वेदना क्या उत्कृष्ट होती है या अनुत्कृष्ट ! ॥ २७ ॥ उक्कस्सा वा अणुक्कस्सा वा ।। २८ ॥ वह उसके उत्कृष्ट भी होती है और अनुत्कृष्ट भी होती है ॥ २८ ॥ उक्कस्सादो अणुक्कस्सा चउट्ठाणपदिदा ।। २९ । वह अनुत्कृष्ट वेदना उत्कृष्टकी अपेक्षा असंख्यात भागहीन, संख्यातभागहीन, संख्यातगुणऔर असंख्यातगुणहीन इन स्थानोंमें पतित है ॥ २९ ॥ aa भावदो किमुक्कस्सा अणुक्कस्सा ? || ३० ॥ उसके उक्त वेदना भावकी अपेक्षा क्या उत्कृष्ट होती है या अनुत्कृष्ट होती है ? ॥३०॥ उक्कस्सा वा अणुक्कस्सा वा ।। ३१ ।। वह उसके उत्कृष्ट भी होती है और अनुत्कृष्ट भी होती है ॥ ३१ ॥ उक्कसादी अणुक्कस्सा छट्ठाणपदिदा ।। ३२ ॥ वह अनुत्कृष्ट उत्कृष्टकी अपेक्षा छहों स्थानों में पतित है ॥ ३२ ॥ जस्स णाणावरणीयवेयणा भावदो उक्कस्सा अणुक्कस्सा ! || ३३ ॥ जिस जीवके ज्ञानावरणीयकी वेदना भावकी अपेक्षा उत्कृष्ट है उसके द्रव्यकी अपेक्षा वह क्या उत्कृष्ट होती है या अनुत्कृष्ट होती है ? ॥ ३३ ॥ तस्स दव्वदो किमुक्कस्सा उक्कस्सा वा अणुक्कस्सा वा ॥ ३४ ॥ वह उसके उत्कृष्ट भी होती है और अनुत्कृष्ट भी होती है ॥ ३४ ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy