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________________ ४, २, १०, ५२ ] वेयणमहाहियारे वेयणवेयणविहाणं [६४९ सिया उदिण्णा च उवसंताओ च ॥ ४० ॥ कथंचित् उदीर्ण एक और उपशान्त अनेक वेदनायें हैं ॥ ४० ॥ सिया उदिण्णाओ च उवसंता च ॥४१॥ कथंचित् उदीर्ण अनेक और उपशान्त एक वेदनायें ॥ ४१ ॥ सिया उदिण्णाओ च उवसंताओ च ॥ ४२ ॥ कथंचित् उदीर्ण और उपशान्त अनेक वेदनायें हैं ॥ ४२ ॥ सिया बज्झमाणिया च उदिण्णा च उवसंता च ॥४३॥ कथंचित् बध्यमान, उदीर्ण और उपशान्त वेदना है ॥ ४३ ॥ सिया बज्झमाणिया च उदिण्णा च उवसंताओ च ॥४४॥ कथंचित् बध्यमान व उदीर्ण एक तथा उपशान्त अनेक वेदनायें हैं ॥ ४४ ॥ सिया बज्झमाणिया च उदिण्णाओ च उवसंता च ॥ ४५ ॥ कथंचित् बध्यमान एक, उदीर्ण अनेक, और उपशान्त एक वेदना है ॥ ४५ ॥ सिया बज्झमाणिया च उदिण्णाओ च उवसंताओ च ॥ ४६ ॥ कथंचित् बध्यमान एक तथा उदीर्ण और उपशान्त अनेक वेदनायें हैं ॥ ४६॥ एवं सत्तण्णं कम्माणं ॥४७॥ इसी प्रकार व्यवहार नयकी अपेक्षा शेष सात कोके वेदनाविधानकी भी प्ररूपणा करनी चाहिये ॥ ४७ ॥ संगहणयस्स णाणावरणीयवेयणा सिया बज्झमाणिया वेयणा ॥४८॥ संग्रहनयकी अपेक्षा ज्ञानावरणीयकी वेदना कथंचित् बध्यमान वेदना है ॥ ४८ ॥ सिया उदिण्णा वेयणा ॥ ४९ ॥ कथंचित् उदीर्ण वेदना है ॥ ४९॥ सिया उवसंता वेयणा ॥ ५० ॥ कथंचित् उपशान्त वेदना है ॥ ५० ॥ सिया बज्झमाणिया च उदिण्णा च ॥५१॥ कथंचित् बध्यमान और उदीर्ण वेदना है ॥ ५१ ॥ सिया बज्झमाणिया च उवसंता च ॥ ५२ ॥ कथंचित् बध्यमान और उपशान्त वेदना है ॥ ५२ ॥ छ.८२ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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