SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 764
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ४, २, ७, २९९ ] वेयणमहाहियारे वेयणभावविहाणे तदिया चूलिया [ ६३९ नाना जीवों सम्बन्धी अनुभागबन्धाध्यवसानस्थानों सम्बन्धी दुगुणवृद्धि - हानिस्थानान्तर आवलीके असंख्यातवें भाग प्रमाण हैं || २८७ ॥ णाणाजीवअणु भागबंधज्झवसाणद्गुणवड्ढि - हाणिट्ठाणंतराणि थोवाणि ॥ २८८ ॥ नाना जीवों सम्बन्धी अनुभागबन्धाध्यवसान दुगुणवृद्धि हानिस्थानान्तर स्तोक हैं ॥२८८॥ एयजीवअणुभागबंधज्झवसाणद्गुणवड्ढि - हाणिट्ठाणंतरमसंखेज्जगुणं ॥ २८९ ॥ उनसे एक जीव सम्बन्धी अनुभागबन्धाध्यवसानद्गुणवृद्धि - हानिस्थानान्तर असंख्यात - गुणा है ॥ २८९ ॥ जव मज्झपरूवणाए द्वाणाणमसंखेज्जदिभागे जवमज्झं ॥ २९० ॥ यवमध्यकी प्ररूपणा करनेपर स्थानोंके असंख्यातवें भागमें यवमध्य होता है ॥ २९० ॥ जवमज्झस्स हेकुदो द्वाणाणि थोवाणि ।। २९१ ॥ यवमध्यके नीचे के स्थान स्तोक हैं ।। २९१ ॥ उवरिमसंखेज्जगुणाणि ।। २९२ ।। ऊपरके स्थान उनसे असंख्यातगुणे हैं ॥ २९२ ॥ फोसण परूवणदाए तीदे काले एय जीवस्स उक्कस्सए अणुभागबंधज्झवसाणट्ठाणे फोसणकालो थोवो ॥ २९३ ॥ स्पर्शनप्ररूपणाकी अपेक्षा अतीत कालमें एक जीवके उत्कृष्ट अनुभागबन्धाध्यवसानस्थान में स्पर्शनका काल स्तोक है ।। २९३ ॥ जहण्णए अणुभागबंधज्झत्रसाणट्ठागे फोसणकालो असंखेज्जगुणो ।। २९४ ।। [४] उससे जघन्य अनुभागबन्धाध्यवसान स्थानों में स्पर्शनका काल असंख्यातगुणा है ॥२९४॥ कंदयस्स फोसणकालो तत्तियो चेव ।। २९५ ।। काण्डकका स्पर्शनकाल उतना ही है ।। २९५ ॥ जवमज्झफोसणकालो असंखेज्जगुणो ।। २९६ ।। [८] उससे यवमध्यका स्पर्शनकाल असंख्यातगुणा है ॥ २९६ ॥ कंदयस्स उवरि फोसणकालो असंखेज्जगुणो ॥ २९७ ॥ [३२] उससे काण्डकके ऊपर वह स्पर्शनकाल असंख्यातगुणा है ॥ २९७ ॥ जवमज्झस्स उवरि कंदयस्स हेट्ठदो फोसणकालो असंखेज्जगुणो ॥ २९८ ॥ [ ७६।५] उससे यत्रमध्यके ऊपर और काण्डकके नीचे स्पर्शनका काल असंख्यात गुणा है ॥ २९८ ॥ [ ७।६।५ ] कंदयस्स उवरि जवमज्झस्स हेट्ठदो फोसणकालो तत्तियो चेव ॥ २९९ ॥ [ ७/६/५] Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy