SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 761
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ छक्खंडागमे वेयणाखंड [४, २, ७, २५६ तत्थ अणंतरोवणिधाए सव्वत्थोवाणि अणंतगुणब्भहियाणिट्ठाणाणि ॥ २५६ ॥ उनमें अन्नतरोपनिधासे अनन्तगुणवृद्धिस्थान सबसे स्तोक हैं ॥ २५६ ॥ असंखेज्जगुणब्भहियाणि हाणाणि असंखेज्जगुणाणि ॥ २५७ ॥ उनसे असंख्यातगुणवृद्धिस्थान असंख्यातगुणे हैं ॥ २५७ ॥ संखेज्जगुणब्भहियाणि वाणाणि असंखेज्जगुणाणि ।। २५८ ॥ उनसे संख्यातगुणवृद्धिस्थान असंख्यातगुणे हैं ।। २५८ ॥ संखेज्जभागब्भहियाणि हाणाणि असंखेज्जगुणाणि ॥ २५९ ॥ उनसे संख्यातभागवृद्धिस्थान असंख्यातगुणे हैं ॥ २५९ ॥ असंखेज्जभागब्भहियाणि हाणाणि असंखेज्जगुणाणि ॥ २६० ॥ उनसे असंख्यातभागवृद्धिस्थान असंख्यातगुणे हैं ॥ २६० ॥ अणंतभागब्भहियाणि हाणाणि असंखेज्जगुणाणि ॥ २६१ ॥ उनसे अनन्तभागवृद्धिस्थान असंख्यातगुणे हैं ॥ २६१ ।। परंपरोवणिधाए सव्वत्थोवाणि अणंतभागब्भहियाणि हाणाणि ॥ २६२ ॥ परम्परोपनिधामें अनन्तभागवृद्धिस्थान सबसे स्तोक हैं ॥ २६२ ॥ असंखेज्जभागब्भहियाणि हाणाणि असंखेज्जगुणाणि ॥ २६३ ॥ उनसे असंख्यातभागवृद्धिस्थान असंख्यातगुणे है ॥ २६३ ॥ संखेज्जभागन्भहियट्ठाणाणि संखेज्जगुणाणि ॥ २६४ ॥ उनसे संख्यातभागवृद्धिस्थान संख्यातगुणे हैं ॥ २६४ ॥ संखेज्जगुणब्भहियाणि हाणाणि संखेज्जगुणाणि ।। २६५ ।। उनसे संख्यातगुणवृद्धिस्थान संख्यातगुणे हैं ॥ २६५ ॥ असंखेज्जगुण भहियाणि हाणाणि असंखेज्जगुणाणि ॥ २६६ ॥ उनसे असंख्यातगुणवृद्धिस्थान असंख्यातगुणे हैं ॥ २६६ ॥ अणंतगुणब्भहियाणि हाणाणि असंखेज्जगुणाणि ॥ २६७ ॥ उनसे अनन्तगुणवृद्धिस्थान असंख्यातगुणे हैं ॥ २६७ ॥ ॥ द्वितीय चूलिका समाप्त हुई ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy