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________________ ४, २, ७, २३२] वेयणमहाहियारे वेयणभावविहाणे बिदिया चूलिया [६३३ असंखेज्जगुणस्स हेट्ठदो असंखेज्जभागब्भहियाणं कंदयघणो बेकंदयवग्गा कंदयं च ॥ २२५ ॥ असंख्यातगुणवृद्धिस्थानके नीचे असंख्यातभागवृद्धियोंका एक काण्डकघन, दो काण्डकवर्ग और एक काण्डक (४३+[४२x२]+४ ) होता है ॥ २२५ ॥ अणंतगुणस्स हेवदो संखेज्जभागब्भहियाणं कंदयघणो बेकंदयवग्गा कंदयं च ॥ अनन्तगुणवृद्धिस्थानके नीचे संख्यातभागवृद्धिस्थानोंका एक काण्डकघन, दो काण्डकवर्ग और एक काण्डक (४ ३+[४२४२]+४ ) होता है ।। २२६ ॥ असंखेज्जगुणस्स हेढदो अणंतभागभहियाणं कंदयवग्गावग्गो तिण्णिकंदयघणा तिण्णिकंदयवग्गा कंदयं च ॥ २२७ ॥ असंख्यातगुणवृद्धिके नीचे अनन्तभागवृद्धियोंका एक काण्डकवर्गावर्ग, तीन काण्डकघन, तीन काण्डकवर्ग और एक काण्डक [४२= १६; १६२-२५६;+२५६-१(४ ३४३)+(४२४३)+४] होता है ॥ २२७ ॥ अणंतगुणस्स हेट्ठदो असंखेज्जभागभहियाणं कंदयवग्गावग्गो तिण्णिकंदयघणा तिष्णिकंदयवग्गा कंदयं च ॥ २२८ ॥ अनन्तगुणवृद्धिकोंके नीचे असंख्यातभागवृद्धियोंका एक काण्डकवर्गावर्ग, तीन काण्डकघन, तीन काण्डकवर्ग और एक काण्डक होता है। [(४४४४१६)+(४३४३)+(४२४३)x४ ] ॥२२८॥ अणंतगुणस्स हेढदो अणंतभागब्भहियाणं कंदयो पंचहदोचत्तारिकंदयवग्गावग्गा छकंदयघणा चत्तारिकंदयवग्गा कंदयं च ॥ २२९ ॥ अनन्तगुणवृद्धिके नीचे अनन्तभागवृद्धियोंका पांच वार गुणित काण्डक, चार काण्डकवर्गावर्ग, छह काण्डकघन, चार काण्डकवर्ग और एक काण्डक [(४४४४४४४४४)+(४४४४१६x४)+ (४३४६)+(४२४४+४ ] होता है ॥ २२९ ॥ समयपरूवणदाए चदुसमइयाणि अणुभागबंधज्झवसाणट्ठाणाणि असंखेज्जा लोगा। समयप्ररूपणामें चार समयवाले अनुभागबन्धाध्यवसानस्थान असंख्यात लोकप्रमाण ॥ २३०॥ पंचसमइयाणि अणुभागबंधज्झवसाणट्ठाणाणि असंखेज्जालोगा ॥ २३१ ॥ पांच समयवाले अनुभागबन्धाध्यवसानस्थान असंख्यात लोक प्रमाण हैं ॥ २३१ ॥ एवं छसमइयाणि सत्तसमइयाणि अट्ठसमइयाणि अणुभागबंधज्झवसाणहाणाणि असंखेज्जा लोगा ॥ २३२ ॥ इस प्रकार छह समय, सात समय और आठ समय योग्य अनुभागबन्धाध्यवसानस्थान असंख्यात लोकप्रमाण हैं ॥ २३२ ॥ हैं छ.८० Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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