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छक्खंडागमे वेयणाखंड
[४, २, ६, १००
उसीके अपर्याप्तकका जघन्य स्थितिबन्ध विशेष अधिक है ॥ ८७ ॥ तस्सेव अपज्जत्तयस्स उक्कस्सओ हिदिबंधो विसेसाहिओ ॥ ८८ ॥ उसी अपर्याप्तकका उत्कृष्ट स्थितिबन्ध विशेष अधिक है ।। ८८ ॥ तस्सेव पज्जत्तयस्स उक्कस्सओ हिदिबंधो विसेसाहिओ ।। ८९ ॥ उसीके पर्याप्तकका उत्कृष्ट स्थितिबन्ध विशेष अधिक है ।। ८९ ॥ संजदस्स उक्कस्सओ द्विदिबंधो संखेज्जगुणो ॥ ९० ॥ संयतका उत्कृष्ट स्थितिबन्ध संख्यातगुणा है ।। ९० ॥ संजदासंजदस्स जहण्णओ द्विदिबंधो संखेज्जगुणो ॥ ९१ ॥ संयतासंयतका जघन्य स्थितिबन्ध संख्यातगुणा है ।। ९१ ॥ तस्सेव उक्कस्सओ हिदिबंधो संखेज्जगुणो ॥ ९२ ॥ उसी संयतासंयतका उत्कृष्ट स्थितिबन्ध संख्यातगुणा है ॥ ९२ ॥ असंजदसम्मादिट्ठिपज्जत्तयस्स जहण्णओ हिदिबंधो संखेज्जगुणो ॥ ९३ ॥ असंयतसम्यग्दृष्टि पर्याप्तकका जघन्य स्थितिबन्ध संख्यातगुणा है ।। ९३ ॥ तस्सेव अपज्जत्तयस्स जहण्णओ द्विदिबंधो संखेज्जगुणो ॥ ९४ ॥ उससे उसी असंयतसम्यग्दृष्टि अपर्याप्तकका जघन्य स्थितिबन्ध संख्यातगुणा है ।। ९४ ।। तस्सेव अपज्जत्तयस्स उक्कस्सओ हिदिबंधो संखेज्जगुणो । ९५॥ उससे उसी असंयतसम्यग्दृष्टि अपर्याप्तकका उत्कृष्ट स्थितिबन्ध संख्यातगुणा है ।। ९५ ॥ तस्सेव पज्जत्तयस्स उक्कस्सओ हिदिबंधो संखेज्जगुणो ॥ ९६ ॥ उससे उसी असंयतसम्यग्दृष्टि पर्याप्तकका उत्कृष्ट स्थितिबन्ध संख्यातगुणा है ॥ ९६ ॥ सण्णिमिच्छाइट्ठिपंचिंदियपज्जत्तयस्स जहण्णओ द्विदिबंधो संखेज्जगुणो ॥९७॥ संज्ञी मिथ्यादृष्टि पंचेन्द्रिय पर्याप्तकका जघन्य स्थितिबन्ध संख्यातगुणा है ॥ ९७ ॥ तस्सेव अपज्जत्तवस्स जहण्णओ हिदिबंधो संखेज्जगुणो ॥ ९८ ॥ उससे उसी अपर्याप्तकका जघन्य स्थितिबन्ध संख्यातगुणा है ॥ ९८ ॥ तस्सेव अपज्जत्तयस्स उक्कस्सओ हिदिबंधो संखेज्जगुणो ॥ ९९ ॥ उससे उसी अपर्याप्तकका उत्कृष्ट स्थितिबन्ध संख्यातगुणा है ।। ९९ ॥ तस्सेव पज्जत्तयस्स उक्कस्सओ हिदिबंधो संखेज्जगुणो ॥ १०० ॥ उससे उसी पर्याप्तकका उत्कृष्ट स्थितिबन्ध संख्यातगुणा है ॥ १० ॥
स्थितिबन्ध समाप्त हुआ।
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