SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 686
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ४, २, ४, १५९ ] छक्खंडागमे वेयणाखंड तीइंदियअपज्जत्तयस्स उक्कस्सओ जोगो असंखेज्जगुणो ॥ १५९ ॥ त्रीन्द्रिय अपर्याप्तकका उत्कृष्ट योग असंख्यातगुणा है ॥ १५९ ॥ चदुरिंदि अपज्जत्तयस्स उक्कस्सओ जोगो असंखेज्जगुणो ॥ १६० ।। चतुरिन्द्रिय अपर्याप्तकका उत्कृष्ट योग असंख्यातगुणा है ॥ १६० ॥ असण्णि पंचिंदियअपज्जत्तयस्स उक्कस्सओ जोगो असंखेज्जगुणो || १६१ ॥ असंज्ञी पंचेन्द्रिय अपर्याप्तकका उत्कृष्ट योग असंख्यातगुणा है || १६१ ॥ सष्णिपंचिंदियअपज्जत्तयस्स उक्कस्सओ जोगो असंखेज्जगुणो ।। १६२ ।। संज्ञी पंचेन्द्रिय अपर्याप्तकका उत्कृष्ट योग असंख्यातगुणा है ॥ १६२ ॥ बीइंदियपज्जत्तयस्स जहण्णओ जोगो असंखेज्जगुणो ॥ १६३ ॥ द्वीन्द्रिय पर्याप्तकका जघन्य योग असंख्यातगुणा है ॥ १६३ ॥ तीइंदियपज्जत्तयस्स जहण्णओ जोगो असंखेज्जगुणो ॥ १६४ ॥ त्रीन्द्रिय पर्याप्तकका जघन्य योग असंख्यातगुणा है ॥ १६४ ॥ चउरिंदियपज्जत्तयस्स जहण्णओ जोगो असंखेज्जगुणो ॥ १६५ ॥ चतुरिन्द्रिय पर्याप्तकका जघन्य योग असंख्यातगुणा है ॥ १६५ ॥ असणि पंचिंदियपज्जत्तयस्स जहण्णओ जोगो असंखेज्जगुणो ॥ १६६ ॥ असंज्ञी पंचेन्द्रिय पर्याप्तकका जघन्य योग असंख्यातगुणा है ॥ १६६ ॥ संण्णिपंचिंदियपज्जत्तयस्स जहण्णओ जोगो असंखेज्जगुणो ॥ १६७ ॥ संज्ञी पंचेन्द्रिय पर्याप्तकका जघन्य योग असंख्यातगुणा है १६७ ॥ बीइंदियपज्जत्तयस्स उक्कस्सओ जोगो असंखेज्जगुणो ॥ १६८ ॥ द्वीन्द्रिय पर्याप्तकका उत्कृष्ट योग असंख्यातगुणा है ॥ १६८ ॥ तीइंदियपज्जत्तयस्स उक्कस्सओ जोगो असंखेज्जगुणो ॥ १६९ ॥ त्रीन्द्रिय पर्याप्तकका उत्कृष्ट योग असंख्यातगुणा है ॥ १६९ ॥ चउरिंदियपज्जत्तयस्स उक्कस्सओ जोगो असंखेज्जगुणो ॥ १७० ॥ चतुरिन्द्रिय पर्याप्तकका उत्कृष्ट योग असंख्यातगुणा है ॥ १७० ॥ असण्णि पंचिंदियपज्जत्तयस्स उक्कस्सओ जोगो असंखेज्जगुणो ॥ १७१ ॥ असंज्ञी पंचेन्द्रिय पर्याप्तकका उत्कृष्ट योग असंख्यातगुणा है ॥ १७१ ॥ सणि पंचिंदियपज्जत्तयस्स उक्कस्सओ जोगो असंखेज्जगुणो ॥ १७२ ॥ संज्ञी पंचेन्द्रिय पर्याप्तकका उत्कृष्ट योग असंख्यातगुणा है ॥ १७२ ॥ छ. ७१ Jain Education International For Private & Personal Use Only [ ५६१ www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy