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________________ ४६४] छक्खंडागमे खुद्दाबंधो [२, ११-२, ४५ बादरवणप्फदिकाइयपज्जत्ता अणंतगुणा ॥ ७२ ॥ बादरवणप्फदिकाइयअपज्जत्ता असंखेज्जगुणा ॥७३॥ बादरवणप्फदिकाइया बिसेसाहिया ॥७४॥ सुहुमवणप्फदिकाइया अपज्जत्ता असंखेज्जगुणा ॥ ७५ ॥ सुहुमवणप्फदिकाइया पज्जत्ता संखेज्जगुणा ॥ ७६ ॥ सुहुमवणप्फदिकाइया विसेसाहिया ॥ ७७॥ वणप्फदिकाइया विसेसाहिया ॥७८ ॥ णिगोदजीवा विसेसाहिया ॥ ७९ ॥ उनसे बादर वनस्पतिकायिक पर्याप्त अनन्तगुणे हैं ।। ७२ ॥ उनसे बादर वनस्पतिकायिक अपर्याप्त असंख्यातगुणे हैं ॥७३॥ उनसे बादर वनस्पतिकायिक विशेष अधिक हैं ॥७४॥ उनसे सूक्ष्म वनस्पतिकायिक अपर्याप्त असंख्यातगुणे हैं ।। ७५ ॥ उनसे सूक्ष्म वनस्पतिकायिक पर्याप्त संख्यातगुणे हैं ।। ७६ ॥ उनसे सूक्ष्म वनस्पतिकायिक विशेष अधिक हैं || ७७ ॥ उनसे वनस्पतिकायिक विशेष अधिक हैं ॥ ७८ ॥ निगोद जीव विशेष अधिक हैं ॥ ७९ ॥ ॥ क्षुद्रकबान्ध समाप्त हुआ ॥ २ ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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