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________________ ४४०] छक्खंडागमे खुद्दाबंधो [२, ८, ५४ आहारा अणाहारा केवचिरं कालादो होंति ? ॥ ५४ ॥ सचद्धा ॥ ५५ ॥ __ आहारक व अनाहारक जीव कितने काल रहते हैं ? ॥ ५४ ॥ आहारक व अनाहारक जीव सर्व काल रहते हैं ।। ५५ ॥ ॥ नाना जीवोंकी अपेक्षा कालानुगम समाप्त हुआ ॥ ८॥ ९. णाणाजीवेण अंतराणुगमो णाणाजीवेहि अंतराणुगमेण गदियाणुवादेण णिरगदीए गेरइयाणमंतरं केवचिरं कालादो होदि १ ॥१॥णत्थि अंतरं ॥ २ ॥ णिरंतरं ॥३॥ नाना जीवोंकी अपेक्षा अन्तरानुगमसे गतिमार्गणाके अनुसार नरकगतिमें नारकी जीवोंका अन्तर कितने काल होता है ? ॥ १॥ उनका अन्तर नहीं होता ॥२॥ नारक राशि निरन्तर है ॥३॥ एवं सत्तसु पुढवीसु णेरइया ॥४॥ इस प्रकार सातों पृथिवियोंमें ही नारकी जीव अन्तरसे रहित होते हुए निरन्तर हैं ॥ ४ ॥ तिरिक्खगदीए तिरिक्खा पंचिंदियतिरिक्ख-पंचिंदियतिरिक्खपज्जत्ता पंचिंदियतिरिक्खजोणिणी पंचिंदियतिरिक्खअपज्जत्ता, मणुसगदीए मणुसा मणुसपज्जत्ता मणुसिणीणमंतरं केवचिरं कालादो होति [होदि] ? ॥५॥णत्थि अंतरं ॥६॥ णिरंतरं ॥ ७ ॥ तिर्यंचगतिमें तिर्यंच, पंचेन्द्रिय तिर्यंच, पंचेन्द्रिय तिर्यंच पर्याप्त, पंचेन्द्रिय तिर्यंच योनिमती और पंचेन्द्रिय तिर्यंच अपर्याप्त तथा मनुष्यगतिमें मनुष्य, मनुष्य पर्याप्त व मनुष्यनियोंका अन्तर कितने काल होता है ? ॥५॥ उनका अन्तर नहीं होता ॥६॥ वे जीव निरन्तर हैं ॥७॥ मणुसअपज्जत्ताणमंतरं केवचिरं कालादो होदि ? ॥ ८॥ जहणेण एगसमओ ॥९॥ उक्कस्सेण पलिदोवमस्स असंखेज्जदिभागो ॥ १० ॥ मनुष्य अपर्याप्तोंका अन्तर कितने काल होता है ? ॥ ८ ॥ मनुष्य अपर्याप्तोंका अन्तर जघन्यसे एक समय होता है ॥ ९॥ तथा उत्कर्षसे उनका अन्तर पल्योपमके असंख्यातवें भाग मात्र काल तक होता है ॥ १० ॥ देवगदीए देवाणमंतरं केवचिरं कालादो होदि ? ॥ ११ ॥ णस्थि अंतरं ॥१२॥ णिरंतरं ॥ १३ ॥ देवगतिमें देवोंका अन्तर कितने काल होता है ? ॥ ११॥ देवगतिमें देवोंका अन्तर नहीं होता ॥ १२ ॥ वे निरन्तर हैं ॥ १३ ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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