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________________ ४१०] छक्खंडागमे खुद्दाबंधो । [२, ६, ३२ __ पंचेन्द्रिय अपर्याप्त जीव स्वस्थान, समुद्घात और उपपादसे कितने क्षेत्रमें रहते हैं ? ॥ ३० ॥ पंचेन्द्रिय अपर्याप्त जीव उक्त तीन पदोंसे लोकके असंख्यातवें भागमें रहते हैं ॥ ३१ ॥ ____ कायाणुवादेण पुढविकाइय आउकाइय तेउकाइय वाउकाइय सुहुमपुढविकाइय सुहुमआउकाइय सुहुमतेउकाइय सुहुमवाउकाइय तस्सेव पज्जत्ता अपज्जत्ता सत्थाणेण समुग्धादेण उववादेण केवडिखेत्ते ? ॥ ३२ ॥ सबलोगे ॥ ३३ ॥ कायमार्गणाके अनुसार पृथिवीकायिक, जलकायिक, तेजकायिक, वायुकायिक, सूक्ष्म पृथिवीकायिक, सूक्ष्म जलकायिक, सूक्ष्म तेजकायिक, सूक्ष्म वायुकायिक तथा इन्हींके पर्याप्त और अपर्याप्त जीव स्वस्थान, समुद्घात और उपपादसे कितने क्षेत्रमें रहते हैं ? ॥ ३२ ॥ उक्त पदोंसे वे सर्व लोकमें रहते हैं ॥ ३३ ॥ बादरपुढविकाइय-बादरआउकाइय-बादरतेउकाइय-बादरवणप्फदिकाइयपत्तेयसरीरा तस्सेव अपज्जत्ता सत्थाणेण केवडिखेत्ते ? ॥ ३४ ॥ लोगस्स असंखेज्जदिभागे ॥ ३५ ॥ ___ बादर पृथिवीकायिक, बादर जलकायिक, बादर तेजकायिक और बादर वनस्पतिकायिक प्रत्येकशरीर और उनके अपर्याप्त जीव स्वस्थानसे कितने क्षेत्रमें रहते हैं ? ॥ ३४ ॥ स्वस्थानसे वे लोकके असंख्यातवें भागमें रहते हैं ॥ ३५ ॥ समुग्घादेण उववादण केवडिखेत्ते ? ॥ ३६ ॥ सन्चलोगे ॥ ३७॥ उक्त बादर पृथिवीकायिकादि समुद्धात व उपपादसे कितने क्षेत्रमें रहते हैं ? ।। ३६ ॥ समुद्घात व उपपादसे वे सर्व लोकमें रहते हैं ॥ ३७ ॥ बादरपुढ विकाइया बादरआउकाइया बादरतेउकाइया बादरवणप्फदिकाइयपत्तयसरीरपज्जत्ता सत्थाणेण समुग्धादेण उववादेण केवडिखेत्ते ? ॥ ३८ ॥ लोगस्स असंखेज्जदिभागे ॥ ३९ ॥ बादर पृथिवीकायिक पर्याप्त, बादर जलकायिक पर्याप्त, बादर तेजकायिक पर्याप्त और बादर वनस्पतिकायिक प्रत्येकशरीर पर्याप्त जीव स्वस्थान, समुद्घात और उपपादसे कितने क्षेत्रमें रहते हैं ? ॥३८॥ उपर्युक्त बादर पृथिवीकायिक पर्याप्त आदि जीव उक्त पदोंसे लोकके असंख्यातवें भागमें रहते हैं ॥ ३९ ॥ बादरवाउकाइया तस्सेव अपज्जत्ता सत्थाणेण केवडिखेते ? ॥ ४० ॥ लोगस्स असंखेज्जदिभागे ॥ ४१ ॥ ___ बादर वायुकायिक और उनके ही अपर्याप्त स्वस्थानकी अपेक्षा कितने क्षेत्रमें रहते हैं ? ॥ ४० ॥ स्वस्थानसे वे लोकके असंख्यातवें भागमें रहते हैं ॥ ४१ ॥ . समुग्घादेण उववादण केवडिखेत्ते ? सबलोगे ? ॥ ४२ ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org.
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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