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४०२ ] छक्खंडागमे खुद्दाबंधो
[२,५, ८९ वचनयोगी और असत्यमृषावचनयोगी द्रव्यप्रमाणसे असंख्यात हैं ॥ ८७ ॥ वचनयोगी और असत्यमृषावचनयोगी जीव कालकी अपेक्षा असंख्यातासंख्यात अवसर्पिणी-उत्सर्पिणियोंसे अपहृत होते हैं ॥ ८८ ॥
खेत्तेण वचिजोगि-असच्चमोसवचिजोगीहि पदरमवहिरदि अंगुलस्स संखेज्जदिभागवग्गपडिभाएण ॥ ८९ ॥
क्षेत्रकी अपेक्षा वचनयोगी और असत्यमृषावचनयोगियों द्वारा सूच्यंगुलके संख्यातवें भागके वर्गरूप प्रतिभागसे जगप्रतर अपहृत होता है ।। ८९ ॥
कायजोगि-ओरालियकायजोगि-ओरालियमिस्सकायजोगि - कम्मइयकायजोगी दव्वपमाणेण केवडिया ? ॥ ९० ॥
काययोगी, औदारिककाययोगी, औदारिकमिश्रकाययोगी और कार्मणकाययोगी जीव द्रव्यप्रमाणसे कितने हैं ? ॥ ९० ॥
अणंता ॥९१॥ अणंताणताहि ओसप्पिणि-उस्सप्पिणीहि ण अवहिरंति कालेण ॥
उपर्युक्त काययोगी आदि जीवराशियोंमें प्रत्येक अनन्त हैं ॥ ९१ ॥ कालकी अपेक्षा वे अनन्तानन्त अवसर्पिणी-उत्सर्पिणियोंसे अपहृत नहीं होती हैं ॥ ९२ ॥
खेत्तेण अणंताणंता लोगा ॥ ९३ ॥ उपर्युक्त जीवराशियां क्षेत्रकी अपेक्षा अनन्तानन्त लोक प्रमाण हैं ॥ ९३ ।। वेउब्बियकायजोगी दबएमाणेण केवडिया? ॥९४॥ देवाण संखेज्जदिभागूणो ॥
वैक्रियिककाययोगी द्रव्यप्रमाणसे कितने हैं ? ॥९४॥ वैक्रियिककाययोगी देवोंके संख्यातवें भागसे कम हैं ॥ ९५ ॥
वेउब्धियमिस्सकायजोगीदव्वपमाणेण केवडिया? ॥९६॥ देवाणं संखेज्जदिभागो॥
वैक्रियिकमिश्रकाययोगी द्रव्यप्रमाणसे कितने हैं ? ॥ ९६ ॥ वैक्रियिकमिश्रकाययोगी द्रव्यप्रमाणसे देवोंके संख्यातवें भाग मात्र हैं ॥ ९७ ॥
आहारकायजोगी दव्यपमाणेण केवडिया ? ॥ ९८ ॥ चदुवणं ॥ ९९ ॥
आहारकाययोगी द्रव्यप्रमाणसे कितने हैं ? ॥ ९८ ॥ आहारककाययोगी द्रव्यप्रमाणसे चौवन हैं ॥ ९९ ॥
आहारमिस्सकायजोगी दव्वपमाणेण केवडिया ? ॥१०० ॥ संखेज्जा ॥१०१॥
आहारमिश्रकाययोगी द्रव्यप्रमाणसे कितने हैं ? ॥ १०० ॥ आहारमिश्रकाययोगी द्रव्यप्रमाणसे संख्यात हैं ॥ १०१ ॥
वेदाणुवादेण इत्थिवेदा दव्यपमाणेण केवडिया ? ॥ १०२ ॥ देवीहि सादिरेयं ॥
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