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________________ ३८४] छक्खंडागमे खुद्दाबंधो [ २, ३, ५० वणप्फदिकाइय-णिगोदजीव-बादर-सुहुम-पज्जत्त-अपज्जत्ताणमंतरं केवचिरं कालादो होदि ? ॥५०॥ वनस्पतिकायिक व निगोद जीव तथा इन्हींके बादर और सूक्ष्म एवं पर्याप्त और अपर्याप्त जीवोंका अन्तर कितने काल होता है ? ॥ ५० ॥ जहण्णेण खुद्दाभवग्गहणं ॥५१॥ उक्कस्सेण असंखेज्जा लोगा ॥ ५२ ॥ उक्त वनस्पतिकायिक व निगोद जीवों आदिका अन्तर कमसे कम क्षुद्रभवग्रहण मात्र काल तक होता है ॥५१॥ तथा अधिकसे अधिक वह असंख्यात लोक प्रमाण काल तक होता है। बादरवणप्फदिकाइयपत्तेयसरीर-पज्जत्ताणमंतरं केवचिरं कालादो होदि ? ॥५३॥ बादर वनस्पतिकायिक प्रत्येकशरीर पर्याप्त जीवोंका अन्तर कितने काल होता है ? ॥५३॥ जहण्णेण खुद्दाभवग्गहणं ॥५४॥ उक्कस्सेण अड्ढाइज्जपोग्गलपरियट्ट ॥ ५५ ॥ बादर वनस्पतिकायिक प्रत्येकशरीर पर्याप्त जीवोंका अन्तर कमसे कम क्षुद्र भवग्रहण काल तक होता है ॥ ५४ ॥ तथा अधिकसे अधिक वह अढ़ाई पुद्गलपरिवर्तन प्रमाण काल तक होता है ॥ ५५ ॥ तसकाइय-तसकाइयपज्जत्त-अपज्जत्ताणमंतरं केवचिरं कालादो होदि ? ॥ ५६ ॥ त्रसकायिक और त्रसकायिक पर्याप्त व अपर्याप्त जीवोंका अन्तर कितने काल होता है ? ॥ जहण्णेण खुद्दाभवग्गहणं ॥५७॥ उक्कस्सेण अणंतकालमसंखेज्जपोग्गलपरियढें ॥ उक्त त्रसकायिकादि जीवोंका अन्तर कमसे कम क्षुद्रभवग्रहण काल तक होता है ॥५७॥ तथा अधिकसे अधिक वह असंख्यात पुद्गलपरिवर्तन प्रमाण अनन्त काल तक होता है ॥ ५८ ॥ जोगाणुवादेण पंचमणजोगि-पंचवचिजोगीणमंतरं केवचिरं कालादो होदि? ॥५९॥ योगमार्गणाके अनुसार पांच मनोयोगी और पांच वचनयोगी जीवोंका अन्तर कितने काल होता है ? ॥ ५९ ।।।। जहण्णेण अंतोमुहुत्तं ॥ ६० ॥ उक्कस्सेण अणंतकालमसंखेज्जपोग्गलपरियढें ॥ पांच मनोयोगी और पांच वचनयोगी जीवोंका अन्तर कमसे कम अन्तर्मुहूर्त काल तक होता है ॥ ६० ॥ तथा अधिकसे अधिक वह असंख्यात पुद्गलपरिवर्तन प्रमाण अनन्त काल तक होता है ॥ ६१ ॥ कायजोगीणमंतरं केवचिरं कालादो होदि ? ॥ ६२॥ काययोगी जीवोंका अन्तर कितने काल होता है ? ॥ ६२ ॥ जहण्णेण एगसमओ ॥ ६३ ॥ उक्कस्सेण अंतोमुहुत्तं ॥ ६४ ॥ काययोगी जीवोंका अन्तर कमसे कम एक समय होता है ॥ ६३ ॥ तथा उनका उत्कृष्ट अन्तर अन्तर्मुहूर्त मात्र होता है ॥ ६४ ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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