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________________ छक्खंडागमे जीवट्ठाणं [ १, ८, १४४ कार्मणकाययोगियों में असंयतसम्यग्दृष्टि गुणस्थानवर्ती उपशमसम्यग्दृष्टियोंसे क्षायिकसम्यग्दृष्टि जीव संख्यातगुणित हैं ॥ १४२॥ क्षायिकसम्यग्दृष्टियोंसे वेदकसम्यग्दृष्टि असंख्यातगुणित हैं ॥ १४३ ॥ वेणुवादे इत्थवेदसु दोसु वि अद्धासु उवसमा पवेसणेण तुल्ला थोवा ॥ वेदमार्गणाके अनुवादसे स्त्रीवेदियों में अपूर्वकरण और अनिवृत्तिकरण इन दोनों ही गुणस्थानोंमें उपशामक जीव प्रवेशकी अपेक्षा तुल्य और अल्प हैं ॥ १४४ ॥ २४० ] खवा संखेज्जगुणा || १४५ ।। अपमत्तसंजदा अक्खवा अणुवसमा संखेज्जगुणा ।। १४६ ।। पमत्तसंजदा संखेज्जगुणा || १४७ || संजदासंजदा असंखेज्जगुणा ॥ १४८ ॥ स्त्रीवेदियोंमें उपशामकोंसे क्षपक जीव संख्यातगुणित हैं ॥ १४५ ॥ क्षपकोंसे अक्षपक और अनुपशामक अप्रमत्तसंयत संख्यातगुणित है ॥ १४६ ॥ उक्त अप्रमत्तसंयतोंसे प्रमत्तसंयत जीव संख्यातगुणित हैं ॥ १४७ ॥ प्रमत्तसंयतों से संयतासंयत असंख्यातगुणित हैं ॥ १४८ ॥ सासणसम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा || १४९ ।। सम्मामिच्छाइट्ठी संखेज्जगुणा || स्त्रीवेदियोंमें संयतासंयतोंसे सासादनसम्यग्दृष्टि जीव असंख्यातगुणित हैं ॥ १४९ ॥ सासादनसम्यग्दृष्टियोंसे सम्यग्मिथ्यादृष्टि संख्यातगुणित हैं ॥ १५० ॥ असंजदसम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा || १५१ ॥ मिच्छादिट्ठी असंखेजगुणा || १५२ ॥ स्त्रीवेदियोंमें सम्यग्मिथ्यादृष्टियोंसे असंयतसम्यग्दृष्टि जीव असंख्यातगुणित हैं ॥ १५१ ॥ असंयतसम्यग्दृष्टियोंसे मिथ्यादृष्टि असंख्यातगुणित हैं ॥ १५२ ॥ असंजदसम्मादिट्ठि-संजदासंज्जदट्ठाणे सव्वत्थोवा खइयसम्मादिट्ठी || १५३ ॥ उवसमसम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा ॥ १५४ ॥ स्त्रीवेदियोंमें असंयतसम्यग्दृष्टि और संयतासंयत गुणस्थानवर्ती क्षायिकसम्यग्दृष्टि सबसे कम हैं ॥ १५३ ॥ उपर्युक्त दोनों गुणस्थानवर्ती क्षायिकसम्यग्दृष्टि जीवोंसे उपशमसम्यग्दृष्टि जीव असंख्यातगुणित हैं ॥ १५४ ॥ वेद सम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा ॥ १५५ ॥ स्त्रीवेदियोंमें उक्त दोनों गुणस्थानवर्ती उपशमसम्यग्दृष्टियोंसे वेदकसम्यग्दृष्टि असंख्यात - गुण हैं ॥ १५५ ॥ पमत्त -अपमत्तसंजदट्ठाणे सव्वत्थोवा खइयसम्मादिट्ठी || १५६ ।। स्त्रीवेदियोंमें प्रमत्तसंयत और अप्रमत्तसंयत गुणस्थानवर्ती क्षायिकसम्यग्दृष्टिं जीव सबसे कम हैं ॥ १५६ ॥ उवसम सम्मादिट्ठी संखेज्जगुणा || १५७ || वेदगसम्मादिट्ठी संखेज्जगुणा || Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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