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________________ १५६ ] छक्खंडागमे जीवट्ठाणं [ १, ५, २०८ __ _क्रियिकमिश्रकाययोगी सासादनसम्यग्दृष्टि जीवोंका उत्कृष्ट काल एक समय कम छह आवली प्रमाण है ॥ २०८ ॥ आहारकायजोगीसु पमत्तसंजदा केवचिरं कालादो होंति ? णाणाजीवं पडुच्च जहण्णेण एगसमयं ।। २०९ ।। __ आहारकाययोगियोंमें प्रमत्तसंयत जीव कितने काल होते हैं ? नाना जीवोंकी अपेक्षा जघन्यसे एक समय होते हैं ॥ २०९ ॥ उक्कस्सेण अंतोमुहुत्तं ॥ २१० ॥ आहारकायजोगी प्रमत्तसंयतोंका उत्कृष्ट काल अन्तर्मुहूर्त है ॥ २१० ॥ एगजीवं पडुच्च जहण्णेण एगसमओ ॥ २११ ॥ एक जीवकी अपेक्षा आहारकाययोगी जीवोंका जघन्य काल एक समय है ॥२११॥ उक्कस्सेण अंतोमुहुत्तं ॥ २१२ ।। एक जीवकी अपेक्षा उक्त जीवोंका उत्कृष्ट काल अन्तर्मुहूर्त है ॥ २१२ ॥ आहारमिस्सकायजोगीसु पमत्तसंजदा केवचिरं कालादो होंति ? णाणाजीवं पडुच्च जहण्णेण अंतोमुहुत्तं ।। २१३ ।। आहारमिश्रकाययोगियोंमें प्रमत्तसंयत जीव कितने काल होते हैं ? नाना जीवोंकी अपेक्षा जघन्यसे अन्तर्मुहूर्त काल होते हैं ॥ २१३ ॥ उक्कस्सेण अंतोमुहुत्तं ॥ २१४ ॥ नाना जीवोंकी अपेक्षा उक्त जीवोंका उत्कृष्ट काल अन्तर्मुहूर्त है ॥ २१४ ॥ एगजीवं पडुच्च जहण्णेण अंतोमुहुत्तं ॥ २१५ ॥ एक जीवकी अपेक्षा आहारमिश्रकाययोगी जीवोंका जघन्य काल अन्तर्मुहूर्त है ॥२१५॥ उक्कस्सेण अंतोमुहुत्तं ।। २१६ ॥ एक जीवकी अपेक्षा उक्त जीवोंका उत्कृष्ट काल अन्तर्मुहूर्त है ॥ २१६ ॥ कम्मइयकायजोगीसु मिच्छादिट्ठी केवचिरं कालादो होति ? णाणाजीव पडुच्च सबद्धा ॥ २१७॥ कार्मणकापयोगियोंमें मिथ्यादृष्टि जीव कितने काल होते हैं ? नाना जीवोंकी अपेक्षा सर्व काल होते हैं ॥ २१७ ॥ एगजीवं पडुच्च जहण्णण एगसमयं ॥२१८ ।। एक जीवकी अपेक्षा उक्त जीवोंका जघन्य काल एक समय है ॥२१८ ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org.
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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