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________________ १, ५, २०८] कालाणुगमे जोगमग्गणा [१५५ एक जीवकी अपेक्षा उक्त जीवोंका जघन्य काल एक समय है ॥ १९७ ॥ उक्कस्सेण अंतोमुहुत्तं ॥ १९८ ॥ उक्त जीवोंका उत्कृष्ट काल अन्तर्मुहूर्त है ॥ १९८ ।। सासणसम्मादिट्ठी ओघं ।। १९९ ॥ वौक्रियिककाययोगी सासादनसम्यग्दृष्टि जीवोंका काल ओघके समान है ॥ १९९ ॥ सम्मामिच्छादिट्ठीणं मणजोगिभंगो ।। २०० ॥ वैक्रियिककाययोगी सम्यग्मिथ्यादृष्टि जीवोंका काल मनोयोगियोंके समान है ॥२०॥ वेउब्बियमिस्सकायजोगीसु मिच्छादिट्ठी असंजदसम्मादिट्ठी केवचिरं कालादो होंति ? णाणाजीवं पडुच्च जहण्णेण अंतोमुहुत्तं ॥ २०१॥ वैक्रियिकमिश्रकाययोगी जीवोंमें मिथ्यादृष्टि और असंयतसम्यग्दृष्टि जीव कितने काल होते हैं ? नाना जीवोंकी अपेक्षा जघन्यसे अन्तर्मुहूर्त काल होते हैं ॥ २०१॥ उक्कस्सेण पलिदोवमस्स असंखेजदिभागो ॥ २०२ ।। नाना जीवोंकी अपेक्षा वैक्रियिकमिश्रकाययोगी मिथ्यादृष्टि और असंयतसम्यग्दृष्टि जीवोंका उत्कृष्ट काल पल्योपमके असंख्यातवें भाग है ।। २०२ ॥ एगजीवं पडुच्च जहण्णेण अंतोमुहुत्तं ॥ २०३ ।। एक जीवकी अपेक्षा उक्त जीवोंका जघन्य काल अन्तर्मुहूर्त है ॥ २०३ ॥ उक्कस्सेण अंतोमुहुत्तं ॥ २०४ ॥ एक जीवकी अपेक्षा उक्त जीवोंका उत्कृष्ट काल अन्तर्मुहूर्त है ॥ २०४ ।। सासणसम्मादिट्ठी केवचिरं कालादो होंति ? णाणाजीवं पडुच्च जहण्णेण एगसमयं ।। २०५॥ वैक्रियिकमिश्रकाययोगी सासादनसम्यग्दृष्टि जीव कितने काल होते हैं ? नाना जीवोंकी अपेक्षा जघन्यसे एक समय होते हैं ॥ २०५ ।। उक्कस्सेण पलिदोवमस्स असंखेजदिभागो ॥ २०६॥ उक्त जीवोंका उत्कृष्ट काल पल्योपमके असंख्यातवें भाग प्रमाण है ।। २०६ ।। एगजीवं पडुच्च जहण्णेण एगसमयं ॥ २०७॥ एक जीवकी अपेक्षा उक्त जीवोंका जघन्य काल एक समय है ॥ २०७।। उक्कस्सेण छ आवलियाओ समऊणाओ ॥ २०८ ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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