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८४] छक्खंडागमे जीवट्ठाणं
[ १, २, १८८ कालकी अपेक्षा असंज्ञी मिथ्यादृष्टि जीव अनन्तानन्त अवसर्पिणियों और उत्सर्पिणियोंके द्वारा अपहृत नहीं होते हैं ॥ १८८ ॥
खेत्तेण अणंताणता लोगा ॥ १८९ ॥ क्षेत्रकी अपेक्षा असंज्ञी मिथ्यादृष्टि जीव अनन्तानन्त लोक प्रमाण हैं ॥ १८९ ॥ अब आहारमार्गणाकी अपेक्षा जीवोंकी संख्याका निरूपण करते हैंआहाराणुवादेण आहारएसु मिच्छाइट्टिप्पहुडि जाव सजोगिकेवलि त्ति ओघं ॥
आहारमार्गणाके अनुवादसे आहारकोंमें मिथ्यादृष्टि गुणस्थानसे लेकर सयोगिकेवली गुणस्थान तक प्रत्येक गुणस्थानवी जीवोंकी द्रव्यप्रमाणप्ररूपणा ओघके समान है ॥ १९० ॥
अणाहारएसु कम्मइयकायजोगिभंगो ॥ १९१ ॥
अनाहारक जीवोंमें द्रव्यप्रमाणकी प्ररूपणा कार्मणकाययोगियोंके द्रव्यप्रमाणके समान है ॥ १९१ ॥
अजोगिकेवली ओघं ।। १९२ ॥ अनाहारक अयोगिकेवली जीवोंकी द्रव्यप्रमाणप्ररूपणा सामान्य प्ररूपणाके समान है ॥
॥ द्रव्यप्रमाणानुगम समाप्त हुआ ॥२॥
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