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________________ १,२, १७० ] दव्वपमाणाणुगमे लेस्सामग्गणा [ ८१ जीवोंमें मिथ्यादृष्टि गुणस्थानसे लेकर असंयतसम्यग्दृष्टि गुणस्थान तक प्रत्येक गुणस्थानवी जीव ओघप्ररूपणाके समान हैं ॥ १६२ ॥ तेउलेस्सिएसु मिच्छाइट्ठी दव्वपमाणेण केवडिया ? जोइसियदेवेहि सादिरेयं । तेजोलेश्यावाले जीवोंमें मिथ्यादृष्टि जीव द्रव्यप्रमाणकी अपेक्षा कितने हैं ? ज्योतिषी देवोंसे कुछ अधिक हैं ॥ १६३ ॥ सासणसम्माइटिप्पहुडि जाव संजदासंजदा त्ति ओघं ॥ १६४ ॥ सासादनसम्यग्दृष्टि गुणस्थानसे लेकर संयतासंयत गुणस्थान तक प्रत्येक गुणस्थानवर्ती तेजोलेश्यासे युक्त जीव ओघ प्ररूपणाके समान पल्योपमके असंख्यातवें भाग हैं ॥ १६४ ॥ पमत्त-अप्पमत्तसंजदा दव्वपमाणेण केवडिया ? संखेज्जा ।। १६५ ॥ तेजोलेश्यावाले जीवोंमें प्रमत्तसंयत और अप्रमत्तसंयत जीव द्रव्यप्रमाणकी अपेक्षा कितने है ? संख्यात हैं ॥ १६५ ॥ पम्मलेस्सिएसु मिच्छाइट्ठी दव्वपमाणेण केवडिया ? सण्णिपंचिंदियतिरिक्खजोणिणीणं संखेज्जदिभागो ॥ १६६ ॥ पद्मलेश्यावाले जीवोंमें मिथ्यादृष्टि जीव द्रव्यप्रमाणकी अपेक्षा कितने हैं ? संज्ञी पंचेन्द्रिय तिर्यंच योनिमती जीवोंके संख्यातवें भाग प्रमाण हैं ॥ १६६ ॥ सासणसम्माइट्टिप्पहुडि जाव संजदासजदा ति ओघं ॥ १६७ ॥ पद्मलेश्यावाले जीवोंमें सासादनसम्यग्दृष्टि गुणस्थानसे लेकर संयतासंयत गुणस्थान तक प्रत्येक गुणस्थानवी जीवोंकी द्रव्यप्ररूपणा सामान्य प्ररूपणाके समान है ॥ १६७ ॥ पमत्त-अप्पमत्तसंजदा दव्वपमाणेण केवडिया ? संखेज्जा ॥ १६८ ॥ प्रमत्तसंयत और अप्रमत्तसंयत पद्मलेश्यावाले जीव द्रव्यप्रमाणकी अपेक्षा कितने हैं ? संख्यात हैं ॥ १६८ ॥ सुक्कलेस्सिएसु मिच्छाइटिप्पहुडि जाव संजदासजदा त्ति दव्वपमाणेण केवडिया? पलिदोवमस्स असंखेज्जदिभागो । एदेहि पलिदोवममवहिरदि अंतोमुहुत्तेण ।। १६९ ॥ शुक्ललेश्यावाले जीवोंमें मिथ्यादृष्टि गुणस्थानसे लेकर संयतासंयत गुणस्थान तक प्रत्येक गुणस्थानवी जीव द्रव्यप्रमाणकी अपेक्षा कितने हैं ? पल्योपमके असंख्यातवें भाग प्रमाण हैं । इन जीवोंके द्वारा अन्तर्मुहूर्त कालसे पल्योपम अपहृत होता है ॥ १६९॥ पमत्त-अप्पमत्तसंजदा दव्वपमाणेण केवडिया ? संखेज्जा ॥ १७० ॥ प्रमत्तसंयत और अप्रमत्तसंयत शुक्ललेश्यावाले जीव द्रव्पप्रमाणकी अपेक्षा कितने हैं ? संख्यात हैं ॥ १७० ॥ छ ११ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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