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________________ ९२ ] छक्खंडागम २२ साहारणमाहारो (७३८) गो. जीवकांड गा. १९२ . २३ एयस्स अणुग्गहणं समगं वकंताणं २५ जत्थेउ मरइ जीवो गो. जीवकांड गा. १९३ २६ बादर सुहुमणिगोदा (७३८) २७ अत्थि अणंता जीवा गो. जीवकांड गा. १९७ २८ एगणिगोदसरीरे (७३९) गो. जीवकांड गा. १९६ वेदना अनुयोगद्वारके भीतर ज्ञानावरणादि कर्मोंकी उत्कृष्ट द्रव्यवेदनाका स्वामी गुणितकर्मांशिक जीवको बतलाया गया है । इस गुणितकर्मांशिक जीवके स्वरूपकी प्ररूपणा षट्खंडागममें उक्त स्थानपर २६ सूत्रोंमें की गई है । इन सब सूत्रोंका आधार कम्मपयडीकी संक्रमकरणकी निम्न लिखित ५ गाथाएं हैं। इनके साथ पाठक षट्खंडागमके निम्न सूत्रोंका मिलान करें कम्मपयडी - गाथा १ जो बायरतसकालेणूणं कम्मट्टिइं तु पुढवीए । बायर पज्जत्तापज्जत्तगदीहेयरद्धासु ॥ ७४ ॥ जोगकसाउक्कोसो बहुसो निश्चमवि आउबंधच । जोगजहुण्णेणुवरिल्लठिइनिसेगं बहुं किच्चा ७५|| बायरतसेसु तकालमेवमंते य सत्तमखिईए । सव्वलहुं पज्जत्तो जोगकसायाहिओ बहुसो ॥ ७६ ॥ जोगजवमझउवरि मुहुत्तमच्छित्तु जीवियवसाणे । तिचरम-दुचरिमसमए पूरित्तु कसायउक्कस्सं ॥ ७७ ॥ जोगुक्कस्सं चरिम-दुचरिमे समए य चरिमसमयम्मि । संपुनगुणियकम्मो पगयं तेणेह सामित्ते ॥ ७८ ॥ __षटखंडागम - सूत्र जो जीवो बादरपुढवीजीवेसु वेसागरोवमसहस्सेहि सादिरेगेहि ऊणियं कम्मट्ठिदिमच्छिदो ॥ ७ ॥ तत्थ य संसरमाणस्स बहुवा पज्जत्तभवा थोवा अपज्जत्तभवा ॥ ८॥ दीहाओ पज्जत्तद्धाओ रहस्साओ अपज्जत्तद्धाओ ॥ ९॥ जदा जदा आउअं बंधादि तदा तदा तप्पाओग्गेण जहण्णएण जोगेण बंधादि ॥ १० ॥ उवरिल्लीणं ट्ठिदीणं णिसेयस्स उक्कस्सपदे हेट्ठिल्लीणं द्विदीणं णिसेयस्स जहण्णपदे ॥ ११ ॥ बहुसो बहुसो उक्कस्साणि जोगट्ठाणाणि गच्छदि ॥ १२ ॥ बहुसो बहुसो बहुसंकिलेस परिणदो भवदि ॥ १३ ॥ एवं संसरिदूण बादर तसपज्जत्तएसुववण्णो ॥ १४ ॥ तत्थ य संसरमाणस्स बहुआ पज्जत्तभवा, थोवा अपज्जत्तभवा ॥ १५॥ दीहाओ पज्जत्तद्धाओ रहस्साओ अपज्जत्तद्धाओ ॥ १६ ॥ जदा जदा आउअं बंधदि तदा तदा तप्पाओग्गजहण्णएण जोगेण बंधदि ॥ १७ ॥ उवरिल्लीणं णिसेयस्स उक्कसपदे हेट्ठिल्लीणं द्विदीणं णिसेयस्स जहण्णपदे ॥ १८ ॥ बहुसो बहुसो उक्कस्साणि जोगट्ठाणाणि गच्छदि ॥ १९॥ बहुसो बहुसो बहुसंकिलेसपरिणदो Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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