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________________ प्रत्याख्या श्रीपञ्चव. २ प्रतिदिनक्रिया नानि ॥२६॥ SAMACROCOCCASISUCCESS तं हियए काऊणं किइकम्मं काउ गुरुसमीवम्मि । गिण्हंति तओ तं चिअ समगं नवकारमाईअं॥५०४॥ आगारेहिं विसुद्ध उवउत्ता जहविहीऍ जिणदिहें । सयमेवऽणुपालणि दाणुवएसे जह समाही ॥५०५ ॥ नवकारपोरसीए पुरिमहक्कासणेगठाणे अ। आयंबिलऽभत्तट्टे चरिमे अ अभिग्गहे विगई ॥५०६॥ दो छच्च सत्त अट्ट य सत्तटु य पंच छच्च पाणम्मि । चउ पंच अट्ट नवए पत्तेअंपिंडए नवए ॥ ५०७॥ दो चेव नमुक्कारे आगारा छच्च पोरिसीए उ । सत्तेव य पुरिमढे एकासणगम्मि अट्टेव ॥ ५०८॥ सत्तेकट्ठाणस्स उ अटेवायंबिलस्स आगारा । पंच अभत्तट्ठस्स उ छप्पाणे चरिम चत्तारि ॥५०९॥ पंच चउरो अभिग्गह निविइए अट्ट नव य आगारा । अप्पावरणे पंच उ हवंति सेसेसु चत्तारि ॥५१०॥ णवणीउग्गाहिमए अद्दवदहि पिसिअ घय गुले चेव । नव आगारा तेसिं सेसदवाणं च अट्टेव ॥५११॥ वयभंगे गुरुदोसो थेवस्सवि पालणा गुणकरी अ। गुरुलाघवं च नेअंधम्मम्मि अओ उ आगारा ॥ ५१२ ॥ जहगहिअपालणंमी अपमाओ सेविओ धुवं होइ । सो तह सेविजंतो वड्डइ इअरं विणासेइ ॥५१३ ।। अन्भत्थो अपमाओ तत्तो मा होज कहवि भंगोत्ति । भंगे आणाईआ तओ अ सत्वे अणत्यत्ति ॥ ५१४ ॥ एवं पमाइणो कह पवजा होइ ? चरणपरिणामा । न य तस्सत्ताणंतरमेव पमाओ खयं जाइ ॥५१५ ॥ जमणाइभवन्भत्थो तस्सेव खयत्थमुज्जएणेह । जहगहिअपालणेणं अपमाओ सेविअघोत्ति ॥ ५१६ ॥ एवं सामइअंपिहु सागारं निअमओ गहेयव्वं । सइ तम्मि निरागारे किंवा एएण कजंति ? ॥५१७ ॥ 1500RRC-ROCCORRENCER ॥२६॥ www.jainelibrary.org an Eduction inte For Private & Personal Use Only
SR No.600005
Book TitlePanchvastukgranth
Original Sutra AuthorHaribhadrasuri
Author
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1927
Total Pages634
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript, Ritual_text, & Conduct
File Size12 MB
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