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________________ अंक 1 दिगम्बर जन । थोंके संबंध जो अदालती झगड़े चल रहे हैं सज्जन सम्मिलित न हों। उससे धन और पुरुषार्थकी महान हानि होरही प्रस्तावक-पं० मक्खनलाल नी देहली है और सर्व जैन समानका गौरव घट रहा है समर्थक-वा० लखपतराय गनौर मतः यह परिषद प्रस्ताव करती है कि नीचे , पं. बाबूरामनी अहारन लिखे महाश्चयोंका एक डेपुटेशन नियुक्त किया , ब्र० सीतलप्रसादनी माय, जो कि दिगम्बर श्वेतांबर दोनों समा- ला• शिवामलनी अम्बाला मोके मखिया और शिक्षित व्यक्तियोंसे मिलकर प्रस्ताव नं. १-यह परिषद प्रस्ताव करती झगड़े मिटाने और एकता उत्पन्न करने का प्रबंध है कि व्यर्थ व्ययको रोकनेके संबंध नीचे करे। लिखी बातें एकदम बन्द की जावें और छोटी। बा० नेमीशरणजी रस्मोंके लिये स्थानीय पंचायतों को प्रेरणा की मि. मुनिसुव्रतदासजी जावे कि वे आप अपने रिवाजों को ध्यानमें बा. रतनलालनी वकील रखते हुए एक दस्तुरुल अमल (कायदा) बना लेवें। बा० बलवीरचन्दजी, १-बाहरकी बरात १०० भादमियोंसे अ. रा. व. सखीचंदजी पुरी धिक न हो। . रा. ब. नांदमलनी भनमेर प्रस्तावक-सेठ मोतीलाल २-पत्तलकी मीठाई ३ छटांकसे अधिक न हो। समर्थक-बा. लक्ष्मीचंदनी ३-जेवर और दाद दिखलाना बंद कियाजाय। ४- बुर बखेर अतिशबानी, बाग बहारी, ,, सेठ तिलोकचंदनी दिहली वेश्यानृत्य, नक्कालोंका नाच, स्वांग आदि ,, मास्टर चेतनदासजी मथुरा , नेमिशरणजी वकील बिजनौर बंद किया जाय । ,, बलबीरचंद जैन वकील मुनफरनगर ५-मृत्यु समयकी ज्योनार व गिदौडा बन्द प्रस्ताव नं० १०-जैन जातिमें बाक विधवा किया जाय । भोंकी संख्याकी अधिक बढ़ती देखकर और ६-द्विरागमन बंद किया जाय । कुमारोंके बिबाह न होते देखकर यह परिषद ... प्रस्तावक-विश्वम्भरदाप्त गागीय झांसी मस्ताव करती है कि बालविवाह वृद्ध विवाह समर्थक-ला. अतरसैन देशभक्त सम्पादक और कन्याविक्रय बंद किया जाय तथा विवाहके समय कन्याकी भायु १३ वर्षसे कम और भनुमोदक-मूलचंद किशनद्रासनी कापड़िया लड़के की आयु १६ वर्षसे कम च हो और ४० , -उपदेशक देवीसहायनी वर्ष के ऊपर कोई पुरुष विवाह न करें। इस : प्रस्ताव नं. १२-परिषद के भागामी मारके प्रस्तावके विरूप को विवाह हो. उनमें कोई खर्चके लिये निम्नलिखित बजट पास किया मावे । . . मेरठ
SR No.543196
Book TitleDigambar Jain 1924 Varsh 17 Ank 06
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMulchand Kisandas Kapadia
PublisherMulchand Kisandas Kapadia
Publication Year1924
Total Pages36
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Digambar Jain, & India
File Size7 MB
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