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भंक ..].
दिगंबर जैन.. द्धार बारामतीवाले शेठ तलकचंद कस्तू- था। मापका नाम चिरस्मरणीय रहनेके चंदकी ओरसे हो रहा है और प्रबंध भी लिये जो स्मारक फंड हमने खोल रक्खा सुधर गया है । इस पर्वत पर एक मन्दिर है उसमें हमारे सभी पाठकोंकी ओरसे वैश्नव सम्प्रदायका भी है और रघुवीरदास कुछन कुछ सहायता अवश्य मिलनी नामक एक वेषधारी साधु रहता था, उससे चाहिए। आपका यह रंगीन चित्र बड़ा
और अपने प्रबंधकोंसे बहुत दिनोंतक भारी खर्चा लगाकर तय्यार कराया. है मुकद्दमा चला था और अन्तमें साधू और जिसको कांचर्मे जड़ाकर अवश्य संग्रह उसके १ चेलेको एक२ वर्षकी जेल हुई है। करनेके लिये सभी पाठकोंको सूचना की शिखरजीकी यात्रासे लौटते समय इस जाती है । सार्थका दर्शन अवश्य करनेयोग्य है। (८-१५) युरपके ८ राजा:-अभी कुछ यह चित्र मंदिरकी जीर्ण अवस्थाका तीन मास हुए युरपमें महाभारत युद्ध है, जो प्रबंधक बाबू हरनारायण द्वारा हो रहा है जिसमें जो ८ राजाएं युद्धमें प्राप्त हुआ है।
___सामिल हुए हैं उनका यह अलग २ चित्र . (६) लेखकसम्मेलन:-इस अंकमें है जिसमें हमारे न्यायप्रिय ब्रीटिश शहेन
गट हुए लेखों भेजनेवाले मूख्य २ लेख- शाह पंचम ज्योर्न भी हैं। .. कोंका यह सम्मिलित ग्रुप तय्यार किया (१६) रायबहादुर लाला इशरीप्रसागया है, जो हमारे पाठकोंको बहुत ही दनी देहलीः-आपकी जीवनीका विस्तार रुचिकर होगा.। लेखकोंके नाम चित्रमें तो बहुत कुछ है, परंतु इधर तो संक्षेपमें दिये गये हैं।
ही लिखते हैं । अपने शुभ नगर देहली . (७) स्वर्गीय दानवीर जैनकुलभूषण (इन्द्रप्रस्थ ) जैसी राजधानी, जो हिन्दु सेठ माणेकचंदजी:-आपका परीचय अब राजाएं, मुसलमान बादशाहों तथा इंग्रेज़ करानेकी कुछ आवश्यकता नहीं है, क्योंकि बादशाहों तक सदैवसे ही राज्यधानी रहती आपको तो सारे हिन्दुस्थानके आबालवृद्ध, चली आई है वहां आपका जन्म अापके
अच्छी तरह से पिछानते हैं और आपका वंशकी सातमी पंक्ति में हुआ और अभी : जीवनपरीचय भी बहुत दफे प्रकट हो आयु ७१ वर्षकी है । और अपने ही
चुका है । यह वीरनर तन, मन और धन समयमें अनेक सुयोग्य कार्य कर अपने तीनों द्वारा जैन समाजका ऐसा कल्याण वंशको महान् उपमा दी, जो अकथनीय है। कर गये हैं कि आजतक किसी भी जैनने . आपके वंशका इतना ही परीचय देना आपके जैसा समाजका उपकार नहीं किया उचित है कि बादशाह अकबर के शासन