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________________ अनेकान्त/55/3 श्रमण साहित्य में वर्णित विभिन्न सम्प्रदाय सम्राट अशोक के शिलालेखों की अमरवाणी -डॉ. भागचन्द जैन 28:1 -श्री निर्द्वन्द 10/308 श्रमण साहित्य - एक दृष्टि साहित्य में अन्तरिक्ष पार्श्वनाथ श्रीपुर -मुनि श्री दुलह राज 28:1 -पं. नेमचन्द धन्नूसा जैन 18/24, 18/265 श्रमण और समाज : पुरातन इतिहास के परिप्रेक्ष । सित्तन्नवासल -गुलाबचन्द अभयचन्द 6/363 में -श्री चित्रेश गोस्वामी 28:1 सिरि खारवेलके शिला की 14वीं पंक्ति श्रमण परम्परा की प्राचीनता -बा कामताप्रसाद 1/230 -पं. कैलाश चन्द्र शास्त्री 28:1 सीरा पहाड़ के प्राचीन जैन गुफा मन्दिर श्रमण संस्कति एवं परम्परा-श्री यगेश जैन 28:1 -- श्री नीरज जैन 15/222 श्रावस्ती का जैन राजा मुहलदेव सूत्रधार मंडन विरचित रूपमंडल में जैन मूर्ति (आचार्य जुगलकिशोर जन्मशती ग्रन्थ) लक्षण -अगरचन्द नाहटा 19/294 श्री गणेश प्रसाद जैन 30:3, 4 सेनगण की भट्टारक परम्परा श्रमण संस्कृति की प्राचीनता : पुरातत्व एव - श्री पं नेमचन्द धन्नूसा 18/153 इतिहास के परिप्रेक्ष्य में -डॉ. प्रेमचन्द जैन 31:3,4 सोनागिरि सिद्ध क्षेत्र और तत्सम्बन्धी साहित्य श्रमण परम्परा -पं. कैलाश चन्द्र शास्त्री 32:34 -डा नेमिचन्द शास्त्री 21/18 श्री लंका और जैनधर्म सोलहवीं शताब्दी की दो प्रशस्तियाँ - डा. ज्योतिप्रसाद जैन 36:4 - परमानन्द शा. 18/19 श्री लंका में जैनधर्म और अशोक संगीत का जीवन में स्थान - श्री राजमल दिल्ली 46:3 -बा छोटेलाल जैन 11/125 श्री सम्मेद शिखर के सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण सगीतपुर के सालुवेन्द्र नरेश और जैनधर्म तथ्य -श्री सुभाष जैन 47:3 -बा. कामतप्रसाद 9/187 श्रुत परम्परा - मुनि श्री कामकुमार नन्दी 47:3 संत श्री गुणचन्द -परमानन्द शास्त्री 17/189 श्री सम्मेद शिखर अंक 53:2 संस्कृत के जैन प्रबन्ध काव्यों में प्रतिपादित श्रमण परम्परा मे प्रतिपादित षट्कर्म व्यवस्था शिक्षा पद्धति -नेमिचन्द शास्त्री 19/109 -डॉ. सुरेश चन्द जैन 54:3, 4 सोलंकी काल में जैन मन्दिरों में जैनेतर चित्रण श्रमण संस्कृति - श्री .सुरेन्द्र पाल सिंह 38:3, 4 -डॉ. हरिहर सिंह 30:3, 4 सम्राट मुहम्मद तुगलक और महान् जैन शासन प्रभावक श्री जिनप्रभसूरी सप्तक्षेत्र रासका वर्ण्यविषय - श्रीअगरचन्द्र नाहटा 33:1 -श्री अगरचन्द नाहटा 15/160 संग्रहालय ऊन में संरक्षित जैन प्रतिमायें 35:3 समन्तभद्र का मुनि जीवन और आपत्काल स्थानीय संग्रहालय पिछोर में संग्रहीत जैन -सम्पादक 4/41, 4/143 प्रतिमायें - श्री नरेशकुमार पाठक 36:1 समन्तभद्र का समय निर्णय सिरसा से प्राप्त जैन मूर्तियां -जुगलकिशोर मुख्तार 14/3 -श्री विद्यासागर शुक्ला 40:1 समन्तभद्र का समय संग्रहालय गूजरी महल में सर्वतोभद्र प्रतिमायें -डा. ज्योतिप्रसाद जैन एम.ए. एल.बी. 14/324 -श्री नरेश कुमार पाठक 45:2
SR No.538055
Book TitleAnekant 2002 Book 55 Ank 01 to 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJaikumar Jain
PublisherVeer Seva Mandir Trust
Publication Year2002
Total Pages274
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Anekant, & India
File Size8 MB
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