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बरमौर महावीर
उखाड़ फेकने की चेष्टा करें, किन्तु दोनों मापस में कभी करण मगधराज बिम्बिसार से तथा उसके पुत्र कुणिकमिलकर इसे समूल नष्ट करने का यत्न न करें, यह एक कोणिक पजात-शत्रु से किया है जिससे बुद्ध और महावीर विचारणीय प्रश्न है। मेरे ख्याल से यदि वे समकालिक समकालिक सिद्ध किये जा सकें । किन्तु इस समीकरण में होते तो प्रवश्य मिलते। उनका कदापि सम्मेलन न होना अनेक दोष हैं। बिम्बिसार शिशुनागवशी क्षत्रीजा का पाश्चर्यजनक है।
उत्तराधिकारी व पुत्र था। किन्तु श्रेणिक का पिता है कुमारिल भट्ट-तीर्थकर महावीर ही नही, पाश्र्वनाथ उपश्रेणिक जिसने श्रेणिक को घर से बाहर निकाल दिया (निर्वाण ८४६ ख० पू०) के पहले भी जैन धर्म प्रच- था और चिलाति को राज्य दिया। चिलाति भयोग्य था। लित था। ऋषभदेव (७६७३ ख. पू.) जैनी के प्रादि वह राज्य न संभाल मका । प्रतः मंत्रियो ने उसे राजपद तीर्थकर है। बौद्ध ग्रन्थों मे जैन सिद्धान्तों का खण्डन है से हटाकर श्रेणिक को राजा बनाया। कोणिक की माता किन्तु जैन ग्रन्थों मे बौद्ध सिद्धान्तों का पता भी नहीं थी चेल्लना जो वैशाली गण के राजा चेटक की कन्या थी। चलता। खुष्टपूर्व षष्ठ शती मे बौद्ध धर्म की जड़ जर्जर प्रजातशत्रु की माता थी कोसलदेवी जो कोसलराज प्रसेनहो गयी थी। कुमारिल भट्ट ने सनातन वैदिक धर्म श्लोक जित की बहन थी। कणिक की पट्टमहिषी थी पप्रावतीको दृढ तर्कसगत करने के लिए महावीर का शिष्यत्व घारिणी-सुभद्रा किन्तु अजातशत्रु की महिषी थी वजिरा किया। गुरुद्रोह के शाप से मक्त होने के लिए कुमारिल जो कोसलराज प्रसेनजित की पुत्री थी। अजातशत्र की भट्ट ने तीर्थराज प्रयाग में तुषानल मे अपना शरीर भस्म राजधानी थी पाटलिपुत्र किन्नु कुणिक की राजधानी थी कर देना उचित समझा, किन्तु शकराचार्य' (५०८-४७६ चम्पा, न कि पाटलिपुत्र । ख० पू०) ने उन्हें बचा लिया। उन्होंने भारत से बौद्धो
पितघातक-कुणिक व अजातशत्रु दोनो पितृघातक का पत्ता काट दिया तथा मार्य वैदिक धर्म की पनाका
भले ही हों, किन्तु स्वप्नेच्छा, अंगुष्ठपीडा तथा कोराफहरायी।
यातना के विवरण में प्राकाश-पाताल का अन्तर है। श्रेणिक - श्रेणिक जैन संघ का नेता तथा महावीर का पिता की मृत्यु के बाद कुणिक ने चम्पा को अपनी राजसमकालिक था। उसकी रानी चेल्लना साध्वियों की नेत्री धानी बनाया। उसने अपना राज्य, सेना व कोष अपने थी। संस्कृत श्रेणिक के प्राकृत व पाली रूप क्रमशः सेणिय ११ भाईयो के लिए ११ भागो मे बांट दिया । चेल्लना के व सनिय है । कुछ प्राधुनिक विद्वानों ने श्रेणिक का समी- दो पुत्र हल्ल व बेहल्ल कुणिक के सगे भाई थे। श्रेणिक २. एज प्राव शकर, मद्राम, १९१६
यज्ञेश्वरः पिता यस्य जिन विजय नामक ग्रंथ में नारायण शास्त्री द्वारा महावादिर्महान् घोरः श्रुतीना चाभिमानवान् । लिखित लेख मे निम्न देखे जा सकते हैं । इसके अनुसार जिनानामन्तकः साक्षात् गुरुद्व ष्यातिपापवान् ।। जैन युधिष्ठिर संवत् का प्रारम्भ ४६८ कलि सवत् में ऋषिवारस्तथा पूर्ण मत्स्याक्षो वाम मेलनात् । हुप्रा । इनका जन्म युधिष्ठिर सवत् २०७७ तथा पराभव एकीकृत्य लभेताः क्रोधी स्यत्तत्र वत्सरः॥ २१०० है । अतः कुमारिल भट्ट का जन्मकाल है कलि भट्टाचार्यकुमारस्य कर्मकाण्डस्यवादिनः। संवत् २५४५ (२०७७+४६८) खष्टपूर्व ५५६ (३१०१- ज्ञेयः प्रादुर्भवस्तस्मिन् वर्षे यौधिष्ठिरे शके ॥ २५४५)। इनका पराभव ३२ वर्ष की अवस्था मे हुमा नन्दाः पूर्णभूश्च नेत्रे मनुजाना च वामतः । तथा शकर इनसे १६ वर्ष की अवस्था में प्रयाग मे ख. मेत्यजे वत्सरो धाता युधिष्ठर शकस्य वै॥ पू० ४६२ मे मिले थे।
भट्टाचार्य कुमारस्य कर्मकाण्डस्य वादिनः । माघ्रोत्कलानां सयोगे पवित्र जयमगले ।।
जात: पराभवस्तस्मिन विज्ञेयो वत्सरे शुभे । ग्रामे तस्मिन् महानदयां भट्टाचार्य कुमारकः ॥ ३. इण्डियन क्रोनोलाजी, भारतीय विद्या भवन, पान्घ्रजातिस्तैत्तिरीयो माता चन्द्रगुणा सती।
बम्बई, १९६३ ।