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वीर-सेवा-मन्दिर के मनस्वो महासचिव श्री महेन्द्र सेन जैनी का देहावसान
साहित्य-जगत् एवं समाज की प्रपूरणीय क्षति अत्यन्त खेद है कि वीर-सेवा-मन्दिर, दिल्ली के उदारचेता महासचिव श्री महेन्द्र सेन जैनी का दीर्घकालीन रुग्णता के पश्चात् ४ सितम्बर, १९७६ को स्वर्गवास हो गया। वे प्रत्यात धर्मात्मा,
साहित्य-प्रेमी, समाजसेवी एव अध्यवसायी थे। उनके निधन से साहित्य जगत् पौर समाज की जो भारी क्षति हुई है, उसकी प्रतिपूर्ति दुर्लभ है।
श्री जैनी का जन्म 20 जनवरी, १९२० को लखनऊ मे हुमा था। उच्च शिक्षा संप्राप्ति के पश्चात् मापने सक्रिय जीवन में प्रवेश किया तथा पूर्ण लगन और अनवरत अध्यवसायपूर्वक प्रापने विभिन्न कार्य-क्षेत्रों मे पूर्ण सफलता प्राप्त की एवं ऊंचे-से-ऊंचे पदों को सशोभित किया। पाप सरिता एव कारवा नामक पत्रिकामों में सेक्रेटरी रहे और तत्पश्चात भारत सरकार के "मंनिक समाचार" नामक पत्र में मापने विज्ञापन प्रबन्धक के पद पर इलाघनीय कार्य किया। तदनन्तर
प्रापने अनेक वर्ष पर्यन्त भारत सरकार के प्रकाशन विभाग (सूचना श्री महेन्द्र सेन जैनी एव प्रसारण मत्रालय) मे महायक व्यापार प्रबन्धक और तदुपरान्त व्या. पार प्रबन्धक जसे गरिमापूर्ण पदो पर कार्य किया। इसके बाद प्रापने विधि, न्याय भोर कम्पनी कार्य मत्रालय के विधि-साहित्य-प्रकाशन मे प्रकाशन एव विक्रय प्रबन्धक के महत्वपूर्ण पद पर कार्य किया पौर वही से १ फरवरी, १९७८ को प्राप सेवा-निवृत्त हुए।
सामाजिक क्षेत्र में भी श्री जनीग्रनेक महत्त्वपूर्ण सस्थानों से सम्बद्ध रहकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पाप जैन सभा, दरियागज, दिल्ली के अनेक मत्र पर्यन्त मत्री रहे तथा मापने लगभग १० वर्ष पर्यन्त जन हायर सेकण्डरी स्कल, दरियागज, दिल्ली के मत्री एवं प्रबन्धक के उत्तरदायित्वपूर्ण पदों पर रहकर सराहनीय कार्य किया। तदुपरान्त प्राप जन ममाज की एकमात्र शोधपीठ वीर-सेवा-मन्दिर के अनेक सत्र पर्यन्त महासचिव रहे और जीवन के अन्तिम क्षण तक भी पाप इस महत्वशाली कार्य का निर्वाह करते रहे।
माहित्य-साधना के क्षेत्र में भी प्रापने अनेक सराह्म कार्य किए। मापने विविध सांस्कृतिक, सामाजिक, सैद्धान्तिक प्रादि विषयो पर महत्वपूर्ण लेख लिखे जो समय-समय पर विभिन्न पत्रलोकप्रिय पत्र-पत्रिकामो में प्रकाशित होते रहे। आपने अनेक पुस्तको का प्रणयन एवं सम्पादन भी किया जो प्रापके ज्ञान-गाम्भीर्य और विश्लेषक बुद्धि के परिचायक है। मापने भारत सरकार द्वारा प्रकाशित “हिन्दी विघि समाचार" नामक पत्र के अनेक वर्ष तक सम्पादक रह कर सरकारी क्षेत्र में हिन्दी के प्रचार और प्रमार में प्रशसनीय योगदान किया।
श्री जैन के विविध सेवाकार्यों का पावन पुण्य करते हुए शोकाकुल वीर-सेवा मन्दिर एव अनेकान्त परिवार भगवान जिनेन्द्र से प्रार्थना करता है कि दिवंगत प्रात्मा को मुगति तथा शान्ति प्राप्त हो। पौर उनके शोकातं परिवार को यह दारुण दुख सहन करने का बल और घेर्य प्राप्त हो।