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भगवान महावीर के जीवनकाल की मुख्य तिथियां
(जैनागमों के प्राधार पर )
ईसा पूर्व
ईसा पूर्व - - ५९९-त्र शुक्ल त्रयोदशी (३० मार्च) को बज्जीसंघ की ५५२-काशी जनपद में विहार तथा अठारहवा वर्षावास
राजधानी वैशाली के निकट क्षत्रिय-कंडग्राम में ज्ञात. राजगह में। कुल में जन्म । पिता के तीन नाम-सिद्धार्थ, श्रेयांस ५५१-मगष जनपद में विहार तथा उन्नीसवी वर्षावास तथा यशस्वी। गोत्र-काश्यप। माता के तीन नाम- पुनः राजगृह में। त्रिशला, विदेहदिन्ना तथा प्रियकाशिनी। गोत्र- ५५०-वक्त जनपद में विहार तथा २०वा वर्षावास वैशाली में वासिष्ठ ।
५४६-विदेह, कोशल तथा पंचाल जनपद में विहार तथा ५७१-२८ वर्ष की प्रवस्था में माता-पिता का देहावसान ।
इक्कीसवां वर्षावास वाणिज्यग्राम में। ५७०-मार्गशीर्ष वदी दशमी (११ नबम्बर) को गृहत्याग ५४८-मगध में भ्रमण तथा बाईसवाँ वर्षावाम राजगन में। करके भनगार श्रमण वन पाना ।
५४७-कोशन जनपद में विहार तथा तेईसवां वर्षावास ५६९-केवल-ज्ञान की प्राप्ति से पूर्व साढे बारह वर्ष के वाणिज्यनाम में ।
छनस्थ काल का प्रथम वर्षावास पास्थेक ग्राम ५४६-7 तथा मगर जनपद में विहार तथा चौवीसवां (वजनीसंघ) में।
वर्षावाम राजगह में। ५६८-छयस्थकाल का द्वितीय वर्षाधाम नालंदा में । ४४५-प्रग तथा विदेश जनपद में बिहार तथा पच्चीसवां ५६७-चम्पा में छास्थ काल का तृतीय वर्षावास ।
वर्षावास मिथिला में । ५६६-प्रयम्घ काल का चतुर्थ वर्षावास पृष्ठ चम्पा में। ५१
५४४-अम जनपद में बिहार तथा छब्बीमा वर्षावास ५६५-भतिया (अंग देश) में छयस्य काल का पाचवा ।
पन : मिथिला में।
५४३-कोशल जनपद में बिहार तथा सत्ताईपा वर्षावास वर्षावास। ५६४-छपस्थ काल का छठा वर्षावास पुनः भद्धिया में।
पूनः मिथिला मे ।
५४२-कोशल, पचाल तण कुरु जनपद में बिहार तथा ५६३-पालभिया (काशी जनपद) में छप्रस्थ काल का
अट्ठाईसवाँ वर्षावाम वाणिज्य ग्राम में । सातवा वर्षावास ।
५४१-मगध जनपद में भ्रमण तथा उन्तीसवी वर्षावास ५६२-छप्रस्थ काल का पाठवा वर्षावास राजगृह में।
राजगह में। ५६१-लाद देश की दूसरी बार यात्रा। इस बार भी वहाँ ५४०-प्रग तथा विदेह जनपद में विहार तथा तीसवा घनघोर उपसर्ग सहन करने पड़े।
वर्षावास वाणिज्यग्राम में। ५६०-लाढ बेश से लौटने के बाद छास्थ काल का दसवा ५३६-कोशल तथा पंचाल जनपद में विहार तथा बर्षावास श्रावस्ती में ।
इकतीसा वर्षावास वैशाली में । ५५६-वंशाली में छपस्थ काल का ग्यारहवी वर्षाबास। ५३८-विदेह, कोशल तथा काशी जनपद में विहार तथा ५५८-उपस्थ काल का बारहवा तथा अंतिम वर्षावास
बतीमा वर्षावास पुन. वैशाली में।
५३७-मगध तथा अंग जनपद में विहार तथा तेतीसा चम्पा में। ५५७-वैशाख शुक्ल दशमी (२६ अप्रैल)को जंभिय प्राम
वर्षावास राजगह में।
५३६-मगध में विहार तथा चौतीसा वर्षावास नालन्दा में। (कुछ विद्वानों के अनुसार राजगह से लगभग ३० मील पर बर्तमान जमई ग्राम) में केवल-ज्ञान की
५३५-विदेह जनपद में बिहार तथा पैतीस वर्षावास प्राप्ति । केवल ज्ञान-प्राप्ति के ६६वें दिन श्रावण
वैशाली में। कृष्ण प्रतिपदा (१ अगस्त) को मगध की राजधानी
५३४-कोशल, पंचाल, शूरसेन तथा विदेहे जनपद में राजगृह के विपुलाचल पर प्रथम प्रवचन, जिसमें
विहार तथा छत्तीमा वर्षावास मिथिला में। मगधराज श्रेणिक बिम्बसार अपनी रानी चेलना के
५३३-मगध में विहार तथा सैतीसा वर्षावास राजगृह में। सहित उपस्थित । उनके इसी प्रवचन से उनके तीर्थ
५३२-मगध में विहार तथा पड़तीमा वर्षावास नालदा में। (चतुर्विध संघ) की स्थापना हुई।
११-विदेह जनपद में विहार तथा उन्तालीसा वर्षावास ५५६-विदेह जनपद में बिहार तथा चौव्हवा वर्षावास मिथिला में। वैशाली में।
५३०-विदेह जनपद में विहार तथा चालीसा वर्षावाम ५५५-वत्स तथा कौशल जनपद में विहार तथा पन्द्रहवा मिथिला में। वाणिज्य ग्राम (वज्जी संघ) में।
५२६-मगध में विहार तथा ४१वा वर्षावाम राजगह में । ५५४-मगध में बिहार तथा सोलहवां वर्षावास राजगह में। ५२८-मगध में विहार तथा ४२ वर्षावास मध्यम पावा में ५५३-अंग व विदेह जनपद में विहार तथा सहा वर्षा- ५२७-दीपावली को मध्यम पावा मे ७२ वर्ष की भायु मे वास वाणिज्य ग्राम मे ।
निर्वाण । 000