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________________ * ॐ महम् * तत्व-सर विश्वतत्त्व-प्रकाशक Vella नीतिविरोधसी लोकव्यवहारवर्तक सम्पन्न - परमागमस्यबीज भुवनैकगुरूर्जपत्यनेकान्तः। Na वर्ष ४ किग्गा ४ । वाग्मेवामन्दिर (मगन्तभद्राश्रम) मग्मावा जिला महारनपुर ज्येष्ठ, चीर निर्वाण मं० २४६७, विक्रम मं० १९९८ । मई १९४१ जिनकल्पी अथवा दिगम्बर माधुका ग्रीष्म-परीषह-जय ग्रीपमकी ऋतुमोदि जल थल सूख जोह, परत प्रचंड धूप श्रागिनी बग्न है। दावाकामी ज्यालमाल बहन बयार अनि, लागत लपट कोऊ धीर न धरत है। धनी तपत मानी नवामी तपाय राग्वी, बडवा-अनल-मम शैल जो जरत है। ताके शृंग शिलापर जोर जुग पॉव घर, करन नपस्या मुनि करम हरत है ।। -कविवर भगवनीदाम भूग्व-प्याम पाई उर अंतर, प्रजले श्रांत देव मब दागै । अमिमरूप धूर ग्रीषमकी, तानी बाल झालमी लागै ।। तपै पहार नाप नन उपजै, को पिन दाह ज्वर जागे। इत्यादिक ग्रीषमकी याधा, महत माधु धीरज नहीं न्यागें ।। मृग्वटि मरोवर जल भर, मम्वहि नांगिनि-तोय । वाटहि बटोही ना चलें, जह घाम गरमी होय || निहँकाल मुनिवर तप तपहि गिरि-शिग्वर टाड़े धीर । ने माधु मेरे उर चमो मंग हर पानक पीर || -कविवर भूधग्दाम
SR No.538004
Book TitleAnekant 1942 Book 04 Ank 01 to 12
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJugalkishor Mukhtar
PublisherVeer Seva Mandir Trust
Publication Year1942
Total Pages680
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Anekant, & India
File Size73 MB
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