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________________ जैन कोनफरन्स हरैल्ड. [मार्च है. उन कुल पुस्तकों का मुकाबला किया जाकर देखा जावे के उनमें किस २ जगह फरक है. मूल, टीका वगैरहमें क्या २ फर्क है इस तरह मुकाबला करने के बाद एक प्रति लिखवाई जावे जिसमें जहां २ जो २ फरक हो वह अपनी तरफ से राय प्रगट किये बिना जैसा जिस पुस्तकमें हो वैसाही इस नई लिखवाई हुई पुस्तकमें दरज करदिया जावे. इस तरहपर जो २ फरक कई कारणोंसे प्रतियोंमें पड गये हैं वे सब एक जगह आ सकते हैं और फिर उन फरकों का निरधार गुरु गम्यताके मुत्राफिक पंडित साधु कर. सकते हैं. . अगरचे इस तरहपर आगमोद्धार अन्य पंडितों के मारफतभी होसकता हैं परन्तु हमारी राय यह है के पण्डित साधु मुनिराजों की निगरानिकी जरूरत है. आगमों की बिरासत ऐसी अमूल्य है के इसका भरोसा साधु मुनिराजों पर ही हो सक्ता है हम आशा करते है के हमारे इस समयके पण्डित मुनिराज इस प्रार्थना पर पूरा २ ध्यान देकर अपना अभिप्राय प्रगट करेंगे और हमारे स्वामिभाईभी अपनी राय बतलावंगे. जैन (श्वेताम्बर दिगाम्बर) काँग्रेस का एक विज्ञापनपत्र "दक्षिण हिंदुस्थान के वराड जिलेमें खामगाम नामका एक शहर है के जहांपर गत माघ सुदि ११ को नवीन मंदिरमें श्री रिषभदेवस्वामीकी प्रतिमा स्थापनका महोत्सव हुवा था. भासपासके गांवों के हजार बारासों मनुष्य इकट्ठे हुवेथे उस समय सभा होकर सम्प के विषय र अच्छे मनोरंजक भाषण हुवे थे, और ज्यादा करके श्वेताम्बरी और दिगाम्बरी जैनियों को परस्पर सम्प कर के रहने की सूचना दिई गई थी. तिस पर यह ठहराव हुवा के भारत वर्षीय श्वेताम्बर दिगाम्बर समुदायकी एक महासभा किई जावे और उस का नाम " इन्डियन न जनरल काँग्रेस" ( Indian Jain General Congress) रखा जावे. इन्तजाम करने नाली कमिटी के प्रेसीडेन्ट सेठ पूरणलालजी श्यामलालजी, आनररी माजिस्ट्रेट खामगांव ले और सेक्रेटरी कल्याणचन्दजी लालचन्दजी एवलावाले मुकरर हुवे हैं. इस कोंग्रेस मी सभा का जलसा चैत्र सुदि १-२-३ बुध, बृहस्पत, शुक्र मुताबिक तारीख ५-६-७ विप्रेल को करार पाया है. इस बातका विज्ञापन पत्र प्रेसीडेन्ट तथा सेक्रेटरी की तरफ से गह २ भेजा गया है. इस विज्ञापनपत्र के अनुसार इस महा सभाको करके जैनियों की निर्मिक तथा सांसारिक उन्नति के बारे में सर्वोपयोगी विषयोंकी चर्चा किई जावेगी." यह विचार जो वराड के जैन समुदाय की तरफसे प्रगट किया गया है साधारण रपर ठीक होने से स्तुतिपात्र है परन्तु यह काम इतना बड़ा है के इसको अच्छी तरह
SR No.536501
Book TitleJain Shwetambar Conference Herald 1905 Book 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGulabchand Dhadda
PublisherJain Shwetambar Conference
Publication Year1905
Total Pages452
LanguageGujarati
ClassificationMagazine, India_Jain Shwetambar Conference Herald, & India
File Size13 MB
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