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________________ ३३८ ,, जैन कोनफरन्स हरेल्ड. [ऑकटोबर पुरूषोतमदास बादामी बी ऐ; एल एल. बी; अहमदाबादक मि. सूरचंद पी. बादामी जोइन्ट सब जज मकरर हुवे हैं. उच्च शिक्षाका यहही फल है. हम मिस्टर बादामीको अपने खरे अन्तःकरणसे मुबारकबादी देते हुवे आशा करते हैं कि जिस तरह वह इज्जत, आबरू और सरकारी औहदे पर बढते जावेंगे उसही तरह कोनफरन्स और अपने समाजकी सेवा और भक्ति अधिकतर तन, मन, धनप्ले करते रहेंगे और इसही मोके पर हम अपने नोजवान जैनी भाइयोंका ध्यान इस तरफ खेंचना चाहते हैं कि वह मिस्टर बादामीकी नजीर लेकर हमेशा उच्च राज्यपदको प्राप्त करनेकी कोशिश करेंगे. राजपूतानामें बारिशकी कमीसे और बारिश टीक वक्तपर न होनेसे दुःकाल पड गया ____ है इस वास्त दुःकाल पीडित जैनियोंकी मददके वास्ते फिलहाल राजपूतानामें कोन्फरन्सकी कोनफरन्सकी तरफसे रु. २०००) दो हजारकी मंजूरी हुई है. तरफसे मदद. राजपूताना प्रान्तिक सेक्रेटरी राय बहादुर सेठ सोभागमलजी ___ ढहाने चिठीयां छपवाकर हालात दरयाफ्त करनेके वास्ते और मदद देनेके वास्ते लोकल सकैटरीयों के पास भेजी हैं. कईका जवाब आ गया है कईका आनेवाला है. मददका काम जारी कर दिया गया है. इस पत्रके अप्रेल मासके अंकमें खबर दी गई थी कि एक पञ्जाब निवासी जैन महाश यनें गवर्मेटकी नोकरीले एक सालकी रुखसत लेकर कोनफरराजपतानाके लिये सके उपदेशकका काम स्वीकार किया है परन्तु उनको रुख. उपदेशक. सत न मिलनेसे वह इस कामको नहीं कर सके. अब हिस्सार ___ भातवर्षीय जैन अनाथाश्रम सोसाइटीनें अपने उपदेशक पंडित चिरंजीलालके वास्ते कोनफरन्सकी दरख्वास्त पर यहं ठहराव किया है कि उक्त पंडित उक्त सोसाइटी और कोनफरन्सका काम श मलातमें करे और उसकी तनरबहा और सफर खर्च आधों आध दिया जावे. पंडित चिरंजीलाल आमलनेर और पेथा पुरकी सभामें हाजर हुवे हैं. अब जल्द राजपूतानामें दोर! करनेवाले है.
SR No.536501
Book TitleJain Shwetambar Conference Herald 1905 Book 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGulabchand Dhadda
PublisherJain Shwetambar Conference
Publication Year1905
Total Pages452
LanguageGujarati
ClassificationMagazine, India_Jain Shwetambar Conference Herald, & India
File Size13 MB
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