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________________ ७५६ अनेकान्त एम. ए., डो. लिट. अंग्रेजी में भूमिका लिख देनेकी भी कृपा करेंगे, और भी जो विद्वान इस पुण्य कार्य में किसी भी प्रकार से अपना सहयोग प्रदान करेंगे वह सब सहर्ष स्वीकार किया जायगा और मैं उन सबका हृदय से आभारी हूँगा । जहाँ जहाँ के शास्त्र भण्डारोंमें उक्त ग्रन्थोंको प्राचीन शुद्ध प्रतियां हों अथवा इनसे भिन्न समन्तभद्र के 'जीवसिद्धि' तथा 'तत्वानुशासन' जैसे ग्रन्थ उपलब्ध हों उन्हें खोज कर विद्वान लोग मुझे शीघ्र ही निम्न पते पर सूचित करने की कृपा करें । [ आश्विन, वीर निर्वाण सं०२४६ था, अब पाठकों को यह जानकर प्रसन्नता होगी कि एक मित्र महोदय के अश्वासन पर उसके प्रकाशन का कार्य शीघ्र प्रारम्भ होने वाला है और उसमें यह खास विशेषता रहेगी कि लक्षणों का हिन्दी में सार अथवा अनुवाद मा प्रकट किया जायगा, जिससे यह महान ग्रन्थ, जो धवला जैजी बड़ी बड़ी चार जिल्दों में प्रकाशित होगा, सभी के लिये उपयोगी साबित होगा - प्रत्येक स्वाध्यायप्रेमी इस से यथेष्ट लाभ उठा सकेगा और सभी मंदिरों तथा लायब्रेरियों में इसका रक्खा जाना आवश्यक समझा जायगा । इसकी विशेष योजना तथा प्रत्येक जिल्द (खण्ड) के मूल्यादि की सूचना बाद को दी जावेगी । (२) 'जैनलक्षणावली' का प्रकाशन जिस 'जैनलक्षणावली' अर्थात् लक्षणात्मक जैन पारिभाषिक शब्दकोश का काम वीरसेवा मन्दिर में कई वर्ष से हो रहा है और जिसका एक नमूना पाठक अनेकान्त के वीरशासनाङ्क में देख चुके हैं, उसके प्रकाशन का कार्य आर्थिक सहयोग न मिलने के कारण एक साल से स्थगित जुगलकिशोर मुख्तार अधिष्ठाता 'वीर सेवा मन्दिर, सरसावा जि० सहारनपुर
SR No.527166
Book TitleAnekant 1940 10
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJugalkishor Mukhtar
PublisherVeer Seva Mandir Trust
Publication Year1940
Total Pages96
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Anekant, & India
File Size11 MB
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