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(क्र. 553) संग्रहीत है। उसे नागी माता का नाम दिया गया है। इस देवी की मैं पहचान नहीं कर सका। संभवतः यह देवी वामा देवी हैं जो बालक पार्श्वनाथ को गोद लिये हैं। बीना बाराह में बामा देवी को लेटी हुई प्रदर्शित किया गया है और उनके सिर पर भी सर्पफण हैं। उन्हें गर्भावस्था की स्थिति में माना गया है। बीना-बारहा की प्रतिमा पार्श्वनाथ के गर्भावस्था की है तो यह बाल्यावस्था की हो सकती है। नैनागिरी पार्श्वनाथ से संबंधित क्षेत्र रहा है। यहाँ पर अधिकांशतः उन्हीं की प्रतिमाएँ प्राप्त हुई हैं। संभव है कि पार्श्वनाथ की सभी अवस्थाओं की प्रतिमाएँ यहाँ स्थापित कराई गई होगीं। यदि यह देवी वामादेवी नहीं है तो संभवतः यह देवी यक्षी अंबिका हो सकती हैं। अंबिका को सर्पफण के साथ भी प्रदर्शित किया जाता रहा है। कुम्भरिया एवं जालौर (राजस्थान) से सर्पफण युक्त अंबिका की प्रतिमाएँ प्राप्त हुई है।
प्रतिमा क्रमांक - 3
यह प्रतिमा तीर्थंकर पार्श्वनाथ की है। सप्तसर्पफणों से युक्त पार्श्वनाथ को पद्मासन मुद्रा में सिंहासनासीन दिखाया गया है। प्रतिमा त्रिछत्र एवं आभामंडल युक्त है। गजारूढ़ देव पुष्प वर्षा या अभिषेक कर रहें हैं, ऊपर गंधर्व हैं, पार्श्व में दांये धरणेन्द्र एवं बांई ओर सर्पफण युक्त पद्मावती है। यह प्रतिमा लगभग 4 फीट ऊँची
है।
प्रतिमा क्रमांक - 4
यह प्रतिमा तीर्थंकर पार्श्वनाथ की है। सप्तफणों से युक्त पद्मासन मुद्रा में ध्यानासीन हैं। सर्पफण के ऊपर त्रिछत्र है। पार्श्व में चामरधारी हैं । सिर के दोनों ओर मालाधार गंधर्व युग्म हैं। परिकर में सिर के ऊपर दोनों ओर तीन-तीन कायोत्सर्ग मुद्रा में जिन आकृतियाँ हैं।
अर्हत् वचन, 23 (1-2), 2011