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________________ हैं। परंतु मैं आलेख के आरंभ की भांति समापन में भी सांप से संबंधित एक वैज्ञानिक आलेख के अंश रख रहा हूँ : साँपों की अब तक 2400 से अधिक प्रजातियाँ खोजी जा चुकी हैं जिनमें से 10 प्रतिशत साँप भी जहरीले नहीं हैं लेकिन उसका खौफ इतना है कि व्यक्ति दहशत के मारे ही दम तोड़ देता है। भारत में पाई जाने वाली 200 से अधिक प्रजातियों में से केवल चार प्रजातियां ही जहरीली है। .... चूहों को खाकर सर्प अनाज की रक्षा करते हैं। अधिकांश लोग सांप को अपना दुश्मन मानते हैं और उसे देखते ही मारने लगते हैं। यह जीव हत्या पाप है। उन्हें भी हमारी तरह जीने का अधिकार है सर्पो का मुँह बार-बार दूध में जबरदस्ती डूबाने से कई सांप दम घुटने से भी मर जाते हैं। दूध से साँप की अंतड़ियों में गहरे जख्म हो जाते हैं जिससे वह दो महीने के भीतर मर जाता है । साँप पालना जुर्म है और ऐसे व्यक्तियों को तीन माह की सजा व 500 रुपये जुर्माना हो सकता है। संदर्भ :1. गांधी मार्ग की विश्वव्यापकता, समाज विज्ञान संकाय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नईदिल्ली ___49, पृ.145 2. Shrimad Raichandra's Reply to Gandhiji's Question's, Shrimad Raj Chandra Ashram Agas, Via Anand, Boria 388130 Gujarat 3. गांधी मार्ग की विश्व व्यापकता, पृ.17 4. वही, 24 5. वही, 46 6. वही, 78-79 7. वही, 36 8. AWBI, News letter Nov. 2009 13/1 Third seaward Road Valmiki Nagar Thiruvanviyur Chennai-41 9. डॉ. विनोद गुप्ता, मनुष्य का दुश्मन नहीं दोस्त है सर्प, विज्ञान प्रगति, जुलाई 2010 सी.एस.आई.आर. डॉ. के.एस.कृष्णनन मार्ग, नई दिल्ली - 110012 प्राप्त : 05.10.10 अर्हत् वचन, 23 (1-2),2011
SR No.526589
Book TitleArhat Vachan 2011 01 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year2011
Total Pages140
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size2 MB
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