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________________ पुष्पराज जैन ने कहा कि संस्था के क्रियाकलापों की विस्तृत जानकारी होने पर उन्हें खुशी हुई है । संस्था द्वारा कराये जा रहे कार्यों को देखते हुए उन्होंने संस्था को 1 लाख 11 हजार रूपये देने की घोषणा की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चांसलर-तीर्थंकर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद श्री सुरेशचन्द्र जैन ने कहा कि जो लोग स्वैच्छिक लाभ समारोह में उपस्थित नगर के सुधीजन देखकर किसी संस्था की स्थापना करते हैं, उस संस्था का विकास नहीं होता है। जनपद में 30-40 हजार जैन समाज की आबादी में अगर आपसी गुटबंदी न हो तो यहां भी जैन विश्वविद्यालय खुल सकता है । मुरादाबाद में 150 एकड़ जमीन में तीर्थंकर महावीर के नाम से इंजीनियरिंग कॉलेज एवं मेडिकल कॉलेज सहित लगभग 15 कॉलेज हैं । जहां उत्तर भारत के 23 राज्यों से आये छात्र-छात्रायें शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन अनूपचन्द्र जैन ने किया। कार्यक्रम के दौरान नरेन्द्र प्रकाश जैन, विजय कुमार जैन, अनूपचन्द्र जैन, प्रमोद कुमार, वीरेन्द्र कुमार जैन, ललितेश कुमार जैन, सुभाषचन्द्र जैन, मुकेश कुमार, हरीकिशन जैन, सुरेशचन्द्र जैन, उपेन्द्र कुमार, जिनेन्द्र कुमार जैन एवं नगर के सभी वर्गों के गणमान्य नागरिक, उद्योगपति एवं समाज सेवी उपस्थित थे। कार्यक्रम जनवरी 2011 में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर अक्षराभिषेक शीर्षक पंचवर्षीय आख्या का भी प्रकाशन किया गया। श्रुत सेवानिधि के संस्थापक - प्राचार्य श्री नरेन्द्र प्रकाश जैन 31 दिसम्बर 1933 को श्री रामस्वरूप जैन शास्त्री के यहाँ जन्म। श्री पी.डी. जैन इण्टर कॉलेज के पूर्व प्राचार्य । लेखक, पत्रकार, धर्म-प्रवचनकार एवं वार्ताकार के रूप में अनेक संस्थाओं से जुड़कर राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक अनूठी पहचान। शिक्षा, धर्म और समाज के क्षेत्र में दीर्घकालीन उल्लेख्य अवदान के लिए सन् 2003 में पश्चिम बंगाल दि. जैन महासभा, कोलकाता द्वारा 'लाइफटाइम अचीवमेण्ट अवार्ड' के रूप में सातसौ पृष्ठीय अभिनन्दन ग्रन्थ 'मनीषा' का समर्पण । स्वाध्याय, सत्संग, सेवा, चिन्तन-मनन तथा सकारात्मक एवं समन्वय मूलक विचारों के प्रचार के लिए देश-विदेश में भ्रमण । श्रीमती राजेश्वरी जैन (धर्मपत्नी) 18 फरवरी 1952 से हर सेवा-कार्य में सहयोगी हैं। अर्हत् वचन सम्पादक मण्डल के अध्यक्ष। 136 अर्हत् वचन, 23 (1-2), 2011
SR No.526589
Book TitleArhat Vachan 2011 01 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year2011
Total Pages140
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size2 MB
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