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________________ श्रुतधाम महोत्सव अनेकान्त ज्ञान मंदिर - श्रुतधाम बीना में परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागरजी महाराज, परम पूज्य मुनि श्री सरलसागरजी महाराज के मंगल आशीर्वाद से एवं परम श्रद्धेय ब्र. संदीप जी 'सरल' के पुनीत सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में श्रुतधाम महोत्सव 20-31 जनवरी 2011 के मध्य आयोजित किया गया। 20 जनवरी 2011 को ध्वजारोहण डॉ. महेन्द्र जी, श्रीमती कांति जैन, कनाडा ने किया । वेदी शिलान्यास का पुनीत कार्यक्रम पं. नन्हें भाई शास्त्री, सागर ने करवाया। श्रुतधाम के नाम से निर्मित सी.डी. (ऑडियो) का लोकार्पण श्री वीरेन्द्र कुमार अशोकनगर ने किया। ब्र. संदीपजी 'सरल' के मंगल प्रवचन भी हुए। 21 जन. को भक्तामर मंडल विधान सानंद सम्पन्न हुआ। 22 जनवरी 2011 को मकराना (राजस्थान) से श्री आदिप्रभु धर्मप्रभावना रथयात्रा का विधिवत् तरीके से प्रस्थान करवाया। 30 जनवरी को अनेकांत ज्ञान मंदिर में प्रातः 9.00 बजे श्री महेन्द्रसिंह एस.डी.एम. महोदय ने मां जिनवाणी की स्थापना रथ पर की, श्री पी.सी. जैन तहसीलदार, विधायक डॉ. विनोद पंथी ने मां भारती की आरती करके शोभायात्रा प्रारम्भ करवाई। एक वृहद् शोभायात्रा हर्षोल्लास, उमंग के साथ शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई कृषि उपज मंडी के विशाल प्रागंण में पहुँचकर धर्मसभा के रूप में परिणत हुई। ब्र. संदीप जी 'सरल' ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज की ऐतिहासिक शोभायात्रा का वर्णन तीन शब्दों में किया जा सकता है । अभूतपूर्व, अनुपम एवं अविस्मरणीय । 31 जन. को घटयात्रा एवं वेदीशुद्धि का कार्यक्रम अतिभव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। 1 फरवरी 11 को प्रातः 8.30 बजे श्री आदिनाथ निर्वाण कल्याणक कार्यक्रम सम्पन्न किया गया एवं वेदी पर भगवान आदिनाथ का मनोज्ञ जिनबिम्ब विराजित किया गया। कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ परीक्षा संस्थान द्वारा दीक्षान्त समारोह आयोजित कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ परीक्षा संस्थान के द्वारा संचालित ज्योतिष प्रशिक्षण के अंतर्गत दीक्षान्त समारोह दिनांक 09.05.2011 को आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती विमला कासलीवाल ने की मुख्य अतिथि नवनाथ आश्रम के संस्थापक श्री दादू महाराज थे। विशेष अतिथि के रूप में श्रीमती अनुपमा जैन उपस्थित थी। मुख्य अतिथि ने अपने उद्बोधन में विभिन्न पहलुओं पर सटीक व निर्णायात्मक सुझाव दिये । वर्तमान कुरीतियों पर प्रहार करते हुए छोटे-छोटे कारगर उपाय भी सुझाये । कालसर्पयोग, पितृदोष, विवाह व शुभ मुहूर्त आदि के समय ध्यान रखी जाने वाली सावधानियों की ओर ध्यान आकृष्ट किया। इस अवसर पर प्रख्यात ज्योतिषाचार्य श्री शिव मेहता एवं श्री मोहन शर्मा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का सशक्त संचालन अधिष्ठाता ब्र. अनिल जैन ने किया। आगन्तुक अतिथियों का स्वागत श्री अरविन्द कुमार जैन व श्री माणकचंद जैन ने किया व आभार प्रशिक्षक मोहन शर्मा ने माना। 130 अर्हत् वचन, 23 (1-2), 2011
SR No.526589
Book TitleArhat Vachan 2011 01 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year2011
Total Pages140
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size2 MB
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