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दुर्लभ पांडुलिपियों की प्रदर्शनी राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन, नईदिल्ली द्वारा मनोनीत पांडुलिपि स्रोत केन्द्र (MRC) तथा पांडुलिपि संरक्षण केंद्र (MCC) कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ द्वारा 1-7 दिसम्बर 2010 को दुर्लभ पांडुलिपि प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। जिसका उदघाटन प्रो. नेथन केट्ज (FIU - Miyami U.S.A.) तथा प्रो. पी.के. मिश्र (कुलपति-देवी अहिल्या
__ स्वर्ण चित्रांकित पांडुलिपियों का आश्चर्यपूर्ण मुद्रा में अवलोकन वि.वि., इंदौर) द्वारा संयुक्त रूप से
करते कुलपति जी किया गया। प्रदर्शनी में स्वर्णाक्षरांकित एवं स्वर्ण चित्रांकित पांडुलिपियों को देखकर माननीय अतिथियों ने सुखद आश्चर्य व्यक्त किया एवं ज्ञानपीठ द्वारा किया जा रहा संरक्षण कार्य संस्कृति की महान सेवा निरूपित की।
ज्ञानपीठ में संग्रहीत लगभग 500 वर्ष प्राचीन पांडुलिपियों को देखकर कुलपति प्रो. मिश्र ने इनके सूचीकरण एवं संरक्षण की आवश्यकता बताई। इस पर यह निर्णय किया गया कि संरक्षण तो (MCC) के अंतर्गत किया ही जा रहा है अकादमिक जगत तक इनकी जानकारी पहुंचाने हेतु इन्दौर में संरक्षित समस्त पांडुलिपियों की सूचियों को क्रमिक रूप से प्रकाशित दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियों का अवलोकन करते अतिथि करने का निश्चय किया जाये। इस हेतु इन्दौर ग्रंथावली शीर्षक से 10 भाग में लगभग 7000 पांडुलिपियों के विवरण प्रकाशित करने का प्रस्ताव बना। इन्दौर ग्रंथावली के प्रथम भाग में कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ में संग्रहीत पांडुलिपियों का विवरण प्रकाशित किया जाये जिससे शेष 49 भागों का एक माडल तैयार हो सके। प्रदर्शनी के अवलोकनोपरान्त विज्ञ महानुभावों द्वारा व्यक्त सम्मतियाँ इसी अंक में मत-अभिमत के अन्तर्गत प्रकाशित हैं।
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अर्हत् वचन, 23 (1-2), 2011