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में ठीक रहता, फिर भी वह लिखा गया स्त्रीलिंग में 'सल्लेखना'। 'मुक्ति के साथ 'वधू' आदि शब्द जोड़कर तो जैन साहित्यकारों ने मानों अपना अन्तर्मन ही व्यक्त कर दिया।
नारी वर्ग के जागरण और उत्थान पर इधर बहुत काम हो रहा है। भारतीय संसद में नारी विशेषाधिकार विधेयक प्रस्तुत हो चुका है। 4 से 15 सितम्बर 1995 तक चीन
की राजधानी बीजिंग में नारियों के संदर्भ में समता, विकास और शांति की उपलब्धि के लिए चतुर्थ विश्व महिला परिषद का अधिवेशन हुआ।
अग्रलिखित जैन विषयों पर पी.एच.डी. की उपाधियाँ दी जा चुकी हैं - 1. जैन और बौद्ध आगमों में नारी, लेखक कोमलचन्द्र जैन, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय,
वाराणसी, 19671 2. Women in Jain Literature & Art (500 B.C. to 13000 A.D.), कमलेश
कुमारी सक्सेना, आगरा विश्वविद्यालय, 1973| 3. स्वयंभू एवं तुलसी के नारी पात्र : तुलनात्मक अध्ययन, योगेन्द्र नाथ शर्मा 'अरूण', __गुरुकुल काँगड़ी, 1973। 4. जैन विदुषी तपस्विनियों का इतिहास, हीराबाई बोरड़िया, इन्दौर, 1976। 5. A Study of the Concept of Sex in Indian Thought & Jainism with . Special Reference to the Madana Parajaya Cario, लक्ष्मीश्वर प्रसाद सिंह, बिहार,
19821 6. जैन एवं बौद्ध दर्शनों में भिक्षुकी संघ की उत्पत्ति, विकास एवं स्थिति, अरूण प्रताप
सिंह, वाराणसी, 19831 7. जैन आगमों में नारी - जीवन, श्रीमती कोमल जैन, इन्दौर, 1986 (प्रकाशन वर्ष)। 8. The Picture of women as dipicted in Naya Dhamma Kahao, (एम.फिल.),
श्रीमती नलिनी बी. जोशी. पुणे, 1988। सन्दर्भ - 1. उपासकाध्ययन, 34 - 480 2. Annibicent, Seven Great Religions, Adyar Library, Madras, 1966 3. हरिवंश पुराण, आ. जिनसेन, भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली, 31, 53-5 4. भगवती आराधना, आ. शिवकोटि, पृ. 987-96 5. सूय गडंग, इत्थि परिण्णा (1,4) 6. ज्ञानपीठ पूजांजलि, भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली, पृ. 26. 7. हरिवंश पुराण, सर्ग 31, 6-7
वही, सर्ग 43, 159-215 वही, सर्ग 21
वही, सर्ग 60 वृहत् कथाकोष, कथा 72
वही, कथा 74 13. वही, कथा 136 14. पद्मपुराण, आचार्य रविषेण, भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली, सर्ग 57, 121 - 122 प्राप्त - 9.12.96
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अर्हत् वचन, अप्रैल 99