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________________ द्वारा देय होगा । यदि आवश्यकता हो तो हमारे प्रतिनिधि भी आपकी सेवा में उपस्थित हैं। सकते 3. जिन विद्वानों / प्रकाशकों ने जैन साहित्य का लेखन / प्रकाशन किया है उनसे भी निवेदन है कि वे पूर्ण सूचियाँ लेखक / शीर्षक / प्रकाशक / प्रकाशन स्थल / प्रकाशन वर्ष / संस्करण / मूल्य / प्राप्ति स्रोत / विषय आदि सूचनाओं सहित शीघ्र - अतिशीघ्र हमें भिजवाने का कष्ट करें। 4. इस परियोजना के अन्तर्गत अप्रकाशित पांडुलिपियों की सूचियाँ भी संकलित की जायेंगी किन्तु उनका प्रकाशन एवं समग्र सूचीकरण दूसरे चरण में किया जायेगा। सभी विद्वानों / प्रकाशकों / भंडारों के व्यवस्थापकों / पुस्तकालयाध्यक्षों / संस्थाओं के पदाधिकारियों से इस महत्वाकांक्षी विस्तृत परियोजना में सहयोग का विनम्र आग्रह है । सराक एवं जैन इतिहास विशेषांक अर्हत् वचन ने अपनी 10 वर्षों की यात्रा में 1. जैन गणित अंक - 1, 1 ( 1 ), सितम्बर 88 2. जैन गणित अंक - 2, 1 (2), दिसम्बर 88 3. संगोष्ठी विशेषांक, 4 (2-3), अप्रैल - जुलाई 92 4. गोपाचल विशेषांक, 5 (1), जनवरी 93 5. जैन पर्यावरण अंक, 6 (3), जुलाई 94 6. जैन धर्म एवं विज्ञान विशेषांक - 1, 9 (2), अप्रैल 97 7. जैन धर्म एवं विज्ञान विशेषांक - 2, 9 (3), जुलाई 97 8. ऋषभदेव अंक- 10 (1), जनवरी 98 सदृश बहुचर्चित विशेषांकों का प्रकाशन किया । श्रवणबेलगोला एवं अयोध्या में महामस्तकाभिषेक के अवसर पर क्रमशः 6 (1) जनवरी 94 तथा 6 (2) अप्रैल 94 के अंकों में सामयिक सामग्री का विशेष रूप से प्रकाशन किया गया। इसके विपरीत हम घोषणा किये जाने के बावजूद शाकाहार विशेषांक एवं जैन ज्योतिर्विज्ञान विशेषांक का प्रकाशन अब तक नहीं कर सके हैं। निकट भविष्य में हमें इनका प्रकाशन करना है। पूर्व घोषणानुरूप हम Notices of Publications स्तम्भ भी अगले अंक से शुरू कर रहे हैं। अर्हत् वचन द्वारा महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषांक प्रकाशन की श्रृंखला में दूसरे दशक का यह प्रथम अंक सराक एवं जैन इतिहास विशेषांक के रूप में आपके हाथों में है। 5 - 6 नवम्बर 95 को पूज्य उपाध्याय श्री ज्ञानसागरजी के सान्निध्य में अ.भा. पत्रकार सम्मेलन एवं सराक सम्मेलन का संयुक्त रूप से आयोजन बडागाँव (मेरठ) में किया गया था जिसमें उपस्थित अनेक पत्रिकाओं के सम्पादकों ने अपनी-अपनी पत्रिका के सराक विशेषांक निकालने की घोषणा की। अर्हत् वचन की विशिष्ट प्रकृति के अनुरूप विशेषांक निकालना किंचित कठिन होने के कारण मैंने घोषणा तो नहीं की किन्तु सहयोगी पत्रकार बन्धुओं एवं विद्वानों से चर्चा के माध्यम से मेरे मन में भी अर्हत् वचन में एतद् विषयक सामग्री के प्रकाशन की भावना जागृत हुई और अन्ततोगत्वा हमनें इस पर विशेष सामग्री युक्त अंक के प्रकाशन की घोषणा कर सामग्री संकलन का कार्य प्रारंभ हुआ। सर्वप्रथम तो मैं हमारे आग्रह पर सामग्री प्रेषित करने वाले माननीय लेखकों- भाई अशोक कुमार जैन ( तिजारा), डा. अभयप्रकाश जैन ( ग्वालियर), श्री रामजीत जैन एडवोकेट (ग्वालियर) एवं डा. कस्तूरचंद कासलीवाल तथा पुस्तक भेजने हेतु डा. नीलम जैन ( सहारनपुर) के प्रति आभार ज्ञापित करता हूँ किन्तु इस अंक हेतु अत्यन्त तत्परता से सम्बद्ध साहित्य एवं अनेकानेक फोटो उपलब्ध कराने हेतु मैं ब्र. अतुलजी अर्हत् वचन, जनवरी 99 7
SR No.526541
Book TitleArhat Vachan 1999 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year1999
Total Pages112
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size8 MB
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