SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 80
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ज्ञानपीठ के प्रांगण से कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ पुस्तकालय शोधकार्यों का वास्तविक ज्ञानपीठ बन सकता है। म.प्र. से सम्बन्धित जैन संदर्भों का अभाव प्रतीत हुआ। पं. आशाधर एवं ग्वालियर के मुनि रइधू तथा ग्वालियर की जैन चित्रकला पर संदर्भ उपलब्ध नहीं हो सके। (सम्बद्ध साहित्य पुस्तकालय में उपलब्ध है - सम्पादक) 12.10.98 7.11.98 मुझे कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ के दर्शन का सौभाग्य मिला पुस्तकों का विषयबद्ध संग्रह सराहनीय है। मुझे हर्ष है कि यहां से ग्रन्थ पढ़कर लोग जैन संस्कृति को प्रकाश में ला रहे हैं। ■ श्री आर. एस. गर्ग सेवानिवृत्त निदेशक, पुरातत्व एवं संग्रहालय, इन्दौर - 8.11.98 मत- अभिमत आज कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ का काम एवं पुस्तकालय देखा बहुत बढ़िया काम है, इसकी बहुत जरुरत है आप बहुत बहुत बधाई के पात्र हैं। 7.11.98 - 78 ■ डा. अरविन्द जैन स्वास्थ्य राज्यमंत्री उ.प्र., लखनऊ ■ श्री मिलिन्द फडे दि. जैन महासमिति, 15, भावना भांडारकर रोड, पुणे - 4 केन्द्रीय संगठन मंत्री कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ जैसी संस्थाओं की जैन समाज को अत्यन्त आवश्यकता है। ऐसी ही संस्थाओं के माध्यम से जैनधर्म एवं संस्कृति की रक्षा हो सकेगी। 7.11.98 - कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ के कार्यकलापों तथा उसके पुस्तकालय को देखकर अत्यन्त प्रसन्नता हुई। यह संस्था जहां जैन धर्म के प्रचार प्रसार में सहायक है वहीं जैन धर्म पर शोधकार्यों हेतु यह पुस्तकालय अत्यन्त ही लाभप्रद तथा उपयोगी होगा। ■ प्रकाशचन्द जैन बड़जात्या 7, प्रगति, श्रीधर नगर, चिंचवड़, पुणे - 411033 ■ डा. विमल कुमार जैन रीडर - भौतिकी विभाग, सी. एल. जैन कॉलेज फिरोजाबाद - 283203 It was a great pleasure to come here and meet the esteemed members of staff of this organisation. I am particularly impressed with Shri Deo Kumar Singh Kasliwal's level of knowledge about India's problems. I am enriched by comming here. I wish this Institute a long life. Prof. Vinod K. Thukral Tulane University U.S.A. अर्हत् वचन, जनवरी 99
SR No.526541
Book TitleArhat Vachan 1999 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year1999
Total Pages112
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size8 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy