________________
मत - अभिमत
ज्ञानपीठ के प्रांगण से
इस पुस्तकालय में जैनधर्म एवं साहित्य विषयक शोध प्रबन्धों को देखकर हार्दिक प्रसन्नता हुई। अन्वेषण, गवेषणा, अनुसंधान से ही प्राचीन नवीन और प्रासंगिक बनता है। आशा है कि अन्य संस्थानों को भी इससे प्रेरणा मिलेगी। 19.12.98
. प्रो. शैलेन्द्रनाथ श्रीवास्तव कुलपति- तिलकामांझी भागलपुर वि.वि.,
भागलपुर (बिहार)
___ मैं दिनांक 19.12.98 को इस शोध संस्थान में आया। शोध का स्तर बहुत ही अच्छा था। यहाँ के सभी लोग बहुत अच्छे थे। में इसके उज्जवल भविष्य की शुभकामना करता हूँ। 19.12.98
. प्रो. सुरेशप्रसाद सिंह कुलपति - वीर कुँवरसिंह वि.वि.,
आरा (बिहार)
इन्दौर में कुलपति सम्मेलन में भाग लेने आया और आज कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ में आकर लगा कि यात्रा सफल हो गई। कर्मधाम की यात्रा तीर्थ और ज्ञान - धाम में बदल गई। गुरु महाराज से प्रार्थना है कि इस ज्ञानपीठ का ज्ञान प्रकाश का दीपक हमेशा जलता रहे, चमकता रहे और इस नगरी के ही नहीं, समस्त संसार के लोगों को प्रकाश देते रहें।
19.12.98
मेजर बलवीरसिंह भसीन कुलपति - मगध वि.वि., बोधगया (बिहार)
शोध निबन्धों को देखकर ऐसा लगा जैसे जैनधर्म की मान्यतायें विश्वविद्यालय से जुड़ रही हैं। अत्यन्त सराहनीय प्रयास है। और भी ऐसे प्रयोग हों, ऐसी कामना है। 19.12.98
. प्रो. दुर्गाप्रसाद तिवारी कुलपति - चौधरी चरणसिंह वि.वि., मेरठ
सर्वथा दर्शनोऽयं ज्ञानतीर्थ:
19.12.98
. प्रो. काशीनाथ मिश्र कुलपति - का. सि. दरभंगा संस्कृत वि.वि.,
दरभंगा (बिहार)
I am very much impressed with such religious institutions. 19.12.98
. Prof. S. N. Prasad V.C.-Jai Prakash Univ., Chhapra
Spirituality and Spiritual values have been the hallmarks of our philosophy and I am delighted that Kundakunda Jñanapitha is rendering a yeoman's service to mankind on thses lines. 19.12.98
- Prof. S.N. Hegde V.C. -Mysore University, Mysore
अर्हत् वचन, जनवरी 99
79