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जब उसे मगध ले गये तो सम्राट खारवेल उसे वापिस उड़ीसा ले आये। उन्होंने और उनकी रानी और सन्तति ने जैन धर्म हेतु अनेक अपूर्व कार्य किये, जिनकी साक्षी, खंडगिरि- उदयगिरि की गुफायें हैं। वर्द्धमान महावीर ने भी कलिंग में जैन धर्म का प्रचार किया था। प्रसिद्ध जैन तीर्थ कोटिशिला भी उड़ीसा के आंचल में कहीं छिपा है, ऐसी जैनों की मान्यता है।
कटक मन्दिर, कटक यद्यपि वर्तमान में जैन धर्म की स्थिति उड़ीसा में नगण्य है, फिर भी उनकी अहिंसा का प्रभाव जन जीवन में देखने को मिलता है। 'सराक' और 'अलेखी' सम्प्रदाय के लोग नि:संदेह प्राचीन जैन ही हैं। जिस राज्य में जैन धर्म की इतनी गौरवपूर्ण परम्परा रही हो वहाँ के मूल निवासियों में धार्मिक संस्कारों की गहरी पैठ स्वाभाविक ही है। हमें इनका स्थितिकरण करना है और उनके विकास में सहभागी बनना होगा। आज भी खण्डगिरि, उदयगिरि के कारण उत्कल प्रान्त भारतीय जैनों के लिये आकर्षण का केन्द्र है। कटक में आज भी एक मंदिर विद्यमान है, जिसकी कला और मूर्तियाँ दर्शनीय है। उड़ीसा वासियों को उन पर गर्व है।
प्राप्त - 16.1.97
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अर्हत् वचन, जनवरी 99