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________________ की चर्चा की। कुन्दकन्दज्ञानपीठ संहितासूरि पं. नाथूलालजी शास्त्री ने कहा कि 'साहित्य एवं समाज के क्षेत्र में वही काम कर सकता है जिसे बाहरी दुनिया से कुछ लेना - देना न हो एवं जो उसके प्रति पूर्णत: समर्पित हो। साहूजी तन-मन-धन से साहित्य सेवा में लगे थे।' प्रो. नवीन सी. जैन, निदेशक ने उन्हें मीडिया का मैग्नेट निरुपित करते हुए कहा कि टाइम्स ऑफ इण्डिया भारत का ऐसा समाचार शोक सभा का दृश्य पत्र है जिसे सारी दुनिया में पढ़ा जाता है। वह भारत की शान है। साहूजी इस समाचार पत्र समूह के अध्यक्ष थे। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका योगदान अविस्मरणीय है। प्रो. श्रेणिक बंडी ने उनके निधन को जैन समाज की अपूरणीय क्षति बतलाया। प्रज्ञाचक्षु ब्र. सखलालजी ने कहा कि जो आया है, उसका जाना तो निश्चित है, किन्तु जो अच्छे काम करके जाता है उसको सभी याद करते हैं। साहूजी का योगदान ही ऐसा है कि उनको युगों-युगों तक याद किया जायेगा। आश्रम ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री कैलाशचन्द चौधरी ने कहा कि परमश्रद्धेय साहूजी के निधन की क्षति पूर्ति तो नहीं हो सकती किन्तु यदि समाज संगठित होकर काका साहब (देवकुमारसिंहजी कासलीवाल) जैसे वरिष्ठजनों के मार्गदर्शन में उनके संकल्पों की पूर्ति हेतु प्रयत्नशील हो तो यह सच्ची श्रद्धांजलि होगी। जब तक सम्मेदशिखर रहेगा, साहूजी का नाम अमर रहेगा। अध्यक्ष श्री कासलीवाल ने साहू अशोककुमारजी से अपने निकट एवं आत्मीय संबंधों की चर्चा करते हुए बताया कि उनके प्रयासो से ही आज सम्मेदशिखर पर दिगम्बर जैन समाज का अधिकार मिला है एवं उसके विकास का पथ प्रशस्त हुआ है। उनकी भावना थी कि सम्पूर्ण जैन समाज संगठित होकर कार्य करे जिससे आधुनिक विश्व को जैन साहित्य के गौरव से परिचित कराया जा सके। आपने कहा कि यद्यपि उनका भौतिक शरीर अब नहीं है लेकिन उनके द्वारा बताया शोक सभा के अवसर पर साहूजी के चित्र पर माल्यार्पण करते गया पथ एवं मार्गदर्शन सदा साथ श्री देवकुमारसिंह कासलीवाल रहेगा। साहूजी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ ही इस अवसर पर 9 बार णमोकर मंत्र का (2)
SR No.526541
Book TitleArhat Vachan 1999 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year1999
Total Pages112
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size8 MB
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