________________
vandanamannaanayamANNNNNNNAVENNNNNNNNNINRNINNNNNNNNNNNNN
પ્રબુદ્ધ જૈન
त०१७-१२-३२ पढतम गहिरानी13२. रहा है, सज्जनो ! हा! इति खेद ! पंचमकाल अवश्य है मगर
उसका सबसे ज्यादा प्रभाव हमारे परही गिरा नजर आता है. लेखक-संघसेवक हेतमुनिजी.
अम्तमें जमशासानके मुनियाको जो कि जैग धर्मक सच्चे प्रायः अंतिम पचीश साहसे जैनधर्म या प्रवृत्तियों उपदेशक, सुधार अथवा समयधर्मबाट उनकोही समज जाना
चाहिए, जिससे शासनमेसे पोश-विषयाद नष्ट हो जाय तथा हो रही है, इससे जैगसमाज अच्छी तरहसे वाकिफ है, यह
परधर्ममें जाते हुए जीव स्वधर्ममें जीवन्त रहे और जनधर्मके तो स्पष्टही है कि दिन प्रतिदिन इंपो, द्वेष और मत्सर बुद्धिको पा रहे है और जिसधर्मको प्रभावना करने के लिये हम कटिबद्ध
उदार सिद्धान्तोको तथा उदार विचारोंकी तथा उशार आचाकर
छाप जगदपर अमर हो जाय । इति ओ३म् शान्तिः हुए हैं और उसी धर्मकी अवगति हमारेही हाथोंसे हो रही है श्री कोरवाजातीर्थम जीबहिंसा-यह सीर्थ २५०० वर्ष यह क्या सगत अफसोसकी बात नहि है।
पूर्वका पूराणा र आर शिवगंज (मारवाड) सें । मलके फासलेपर में श्री संघसें, उसमेंभी जैनधर्मके आचार्योको, उपाश्याय
उपाय है, हाल यह तीय पीडितावस्थामै पड़ रहा है. यहाँ जैनोंकी महाराजाओंको, पन्यासपद धारकोंको तथा गशिपद भूषित ।
वस्ती मात्र २५ घरको है, बहुरासी वस्ती राजपूताको है. यह मुनियोंको तथा सामान्य साधुओझे भी विनंति कलंगा कि गामने मुखी गांवके ठाकोर है, इस मंदिरके समिपपति बहकि आपही जनधर्मके संच उहारक हो और आप लोगोकोहा इसमें टाकरको पालादेयामा स्थान होगेसे प्रतिवर्ष दशहरा के तहेवारम हिस्सा म लेना चाहिए। वर्तमानके बोया प्रकरणसे समाजमें संकटी जीवोंकी का होती है मगर अपसोसकी बात यह है कितना बया हो रहा है और उतनेमेही एक विषयका निपटार कि चार मलके फासलोपर शिवगंजमें ६०० ओशबाल-पोस्वाक न करते हुए प्रतिदिन नये यखेटे समाजमें पैदा कर दिये जाते भाईयाका घर होने परमी हिंसा बन्द नहि करा सकसे ? - जसम मादागावाका अदाका वा हात पचता हादीलगारीके साथ कहना पड़ता है कि आडंबरी उत्सवॉफी पीछे
मैं स्पष्टतवासे कहूँगा कि ऐसे सगठोंसे जैनधर्मके तत्व. लाखो रुपये खरचते हैं किन्तु चारमैल नजीकके एक पूराणा तीर्थों शानको, जैनधर्मधारकनीयाँको कुठभी लाभ नहि होता किन्तु होती हिंसा बन्द नहि करा सकते। यह बहुत शरम जनक जनधर्मकी जगत में ईसी और नवहेलना होती है तथा उसकी है, यह हिंसा अन्द करवाने के लिये प्राम्यजनों मिलकर यहाँका प्रमाणिकता पर कुठारावास होता है.
ठाकुरस बिनति करो, यदि न माने तो सत्याग्रह करों. और मैं तो अपने जनधर्मके शुभचिंतकोको अर्ज करता है जैसे में बम्बई जीवदया मंदली और अहमदाबाद जीवदया मेवल स हो सके वसे जरिवही इन सगका निगटार करदे अगर भाषा · प्रार्थना करता हूं कि अपनी साथ देकर दरवर्ष होतो सेंकडोकी काळमें भी ऐसी स्थिति रही तो जान धमीयोंको और उसमें संपाम हिंसा चन्द करावे और महत्पुण्योपार्जन करें, भी साधुसंस्थाको बहुत सहन करना पड़ेगा।
-मी. भोगीलाल पेषापुरी. जिनके पास श्री महावीर प्रभुके उपदेश रनों का खजाना
વિદ્વાનને ખુશ ખબર. भरा पड़ा है, जिनके पास आदिलाफा अमशिम वास है, जिनको पास अद्वितीय ज्ञानका खोत यह रहा है वैसे अगर कायरोंके
(न्यायने। अपूर्व ) तरह भापस भापसमें लगने वेढे वहतो सस्त रुखाकी वात के, જેની લાંબા સમયથી રાક જોવાઈ રહી હતી અને જે उनका तो अब समयकी प्रतीक्षा न करते हुंवे जग्दि दी समा-
मने छ भने युनिवर्सिटीना न्युमेटना धान कर लेना चाहिए, समाधानही, संपमेही सबकी सुख मां-बाप अपभाभी ने मेशिनमा मापसे, बार शान्ति है.
त-पापना अद्वितीय अथ "प्रमाणनपत्त-चालोक' (अभाजयमुझे फिर अफसोस और जके साथ कहना पडता है कि
તાલાલ' ફાર) કે જેને વાચ્છામનો પુરધર વિદ્વાન વાદિवर्तमानमें जन धर्मके कितनक अखबारों में ऐसे लेनस बाते है
વરિએ બનાવેલ છે, તે સદ્ધ અને સુંદર બાલાર્ષિની નાની जो कि जनधर्मको हानि पहुँचानेवाले है। उनको य लेख कतई न छोपने वाहिए।
તદ્દન નરી અપ્રસિદ્ધ રીકા છે પૈડા સમયમાં બહાર પડરો. दूसरी आरस दिगम्वरलोग शीर्योके विषयों मन चाहा
આ અને ન્યાયકામ્પતીપું, તર્કોત્રકાર મુનિરાજશ્રી હિમાંશુ उत्पात करते है और स्थानकवासीनी आगमादि पद याको न
વિજઇએ જેડીટ ફરિત્ર છે અને જેમાં નેટ, પાÉનર, ગનુमानते हुए अपनी उल्टी ही गंगा न.रते है. तो इस समयमें
મણિદા રામા કે માપી પ્રસ્તાવનામાં ય ચ, ચચાર મતે જન
-જયના વિશ્વમાં મારે પ્રકાશ પાળે છે, એકવીશ તિલી સુંદર धापसमें न झगड़ते हुए अगर ऐक्य कर लीया जाब तोही
કામમાં, કઉન સોળ પેજી સાઈઝમાં લગભગ સવાબસે પૃષ્ઠના स्याण है चरम अवनति ही है. और बदि सबसे प्रथम साधुले.ग भी अपना ऐक्य र
છાદાર ગ્રંચની કિંમ્મત માત્ર . -૧૪-૪ ચાના છે,
પેસ્ટેજ ગજ્જર लेलो भी अच्छा है. पीछे श्रावक वर्ग अपने जाप रास्ते पर ।
भगवान - आजायेंगा, दुनियामें कहावत है कि रावणका राज्य बनिया न भेसभा मे श्रीवि सुस्थिभारा होनेसे गया' अगर या बहावत वर्तमान में विपरितार्यको चरि
मु. पाबीtegle
य १२।३० तार्थ कर रहा है, बनियाका राषशासन उन्हीफे हाथोंसे गष्ट हो
( मा) ) Barrt (भाजपा) Printed by Lalji Harsty Lalan at Mahendra Printing Press, Gaya Building Masjid Berdar Red Bombay, 3 and Publisted ly hivial Jhaverchand Sanghvi for
Juin Yuvak Sangh at 26-30, Dhanji Street Burnly, 3.