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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir श्रुतसागर अगस्त-२०१७ छे अने तेमनां शिष्य गुप्तिगुप्त छे. डॉ. फ्लीटर्नु मानतुं छे के आ बीजा भद्रबाहुए दक्षिणनी यात्रा करी हती अने चंद्रगुप्त ए एमनां शिष्य गुप्तिगुप्तनुं ज बीजं नाम छे. अर्थात् आ बीजा भद्रबाहु विक्रमनां बीजा सैकामां थयां छे. ___ दिगंबर ग्रथोनी जेम श्वेतांबर ग्रंथोमां श्रुतकेवली भद्रबाहु स्वामी पासे मौर्यसम्राट चंद्रगुप्ते दीक्षा लीधानो क्यांय उल्लेख नथी. एक तो ए बन्ने समकालीन नथी, वळी जेम चाणक्य मंत्रीनां अंतिम अनशननो उल्लेख मळे छे तेम जो मौर्यसम्राट चंद्रगुप्ते दीक्षा लीधी होत तो तेनो उल्लेख पण जरूर मळत. आवो महाप्रतापी सम्राट दीक्षा ले अने तेनो उल्लेख सुधां न मळे ए वात संभवित नथी लागती. ____ आ माटे विशेष जिज्ञासुए “वीर निर्वाण संवत् और जैन कालगणना” तथा “दिगंबर शास्त्र कैसे बने” शीर्षक निबंधो जोवां. में पण अहीं तेनो ज उपयोग कर्यो छे. ७. स्थूलिभद्रजी मगध देशनां पाटलीपुत्र(हाल- पटणा) नगरमां, ब्राह्मण ज्ञातिनां गौतम गोत्रवाळां शकडाळ मंत्रीने त्यां तेमनो जन्म थयो हतो. तेमनी मातानुं नाम लक्ष्मीदेवी हतुं. तेमनां पिता कुलपरंपरागत मंत्री पदे हतां अने ए बधां जैनधर्मी हतां. प्रथम नंदनां वखतथी तेमनां कुंटुबमां मंत्रीपदुं चाल्यु आवतुं हतुं. शकडाळ नवमा नंदनां मंत्री हतां. स्थूलभद्रजीने सिरियक(श्रीयक) नामे भाई अने जख्खा, जख्खदिन्ना, भूया, भूयदिन्ना, सेणा, वेणा अने रेणा नामनी सात बहेनो हती. युवावस्थामां स्थूलभद्र कोशा नामक वेश्यानां अनुरागमां पड्यां हता. तेमनां पिता मंत्री शकडाळ वररूचिनामक ब्राह्मणनां षडयंत्रनां भोग बनी राजकोपथी बचवा पोतानां पुत्रनां हाथे ज भरराजसभामां मरण पाम्यां हता. तेमनां मरण पछी वररूचिर्नु कावतुं फूटी गयु अने सिरियकनां कहेवाथी राजाए स्थूलभद्ने मंत्रीपद माटे निमंत्रण मोकल्यु. बार वर्षे कोशानु घर छोडी स्थूलभद्र राजसभामां गयां अने मत्रीपदनां स्वीकारनो जवाब विचार करीने आपवानुं का. उद्यानमां विचार करतां करतां तेमने साधुपणुं लेवू योग्य जणायु अने त्यां ज वेशपरिवर्तन करी राजसभामां जई ‘धर्मलाभ' पूर्वक बोल्याः हस्ते मुद्रा मुखे मुद्रा मुद्रा स्यात् पादयोर्द्वयोः । तत्पश्चात् गृहे मुद्रा व्यापारं पंचमुद्रिकम् ॥१॥ पछी संभूतिविजयसूरि पासे जई सविधि दीक्षा लीधी अने शास्त्रोनो अभ्यास को. आ अरसामां भयंकर बार दुकाळी पडी तेथी श्रुतज्ञान घटवा लाग्यु हतुं. For Private and Personal Use Only
SR No.525325
Book TitleShrutsagar 2017 08 Volume 04 Issue 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHiren K Doshi
PublisherAcharya Kailassagarsuri Gyanmandir Koba
Publication Year2017
Total Pages36
LanguageGujarati
ClassificationMagazine, India_Shrutsagar, & India
File Size9 MB
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