SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 93
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ गुजराती अनुवाद : अही आवतां मारी नजीक मां दिव्य मणि जेने तारा बड़े अपायो तेज तारा वास्तविक पिता ते अव मां थशे। हिन्दी अनुवाद : यहाँ मेरे पास आते समय दिव्य मणि जिसको तुम्हारे द्वारा दिया गया वही उस भव में तुम्हारा वास्तविक पिता होगा। गाहा : पासम्मि सुप्पइट्ठस्स सूरिणो पाविऊण गिहि-धम्म । अह लद्धं समणत्तं काहिसि संसार-वोच्छेयं ।।७१।। संस्कृत छाया : पार्श्वे सुप्रतिष्ठस्य सूरेः प्राप्य गृहिधर्मम् । अथ लब्ध्वा श्रमणत्वं करिष्यसि संसारव्यवच्छेदम् ।।७१।। गुजराती अनुवाद : सुप्रतिष्ठ आचार्य भगवंत पासे तुं श्रावक धर्मनो स्वीकार कटीने पछी साधुपणु स्वीकारीने संसारनो अंत करीश। हिन्दी अनुवाद : सुप्रतिष्ठ भगवंत के साथ तूं श्रावक धर्म स्वीकार कर बाद में साधु हो तुम संसार का अंत करोगे। गाहा : इय केवलिणा भणिए तहत्ति बहु मन्निऊण तव्वयणं । ति पयक्खिणिऊण पुणोऽभिवंदिओ सो मए भयवं ।।७२।। संस्कृत छाया : इति केवलीना भणिते तथेति बहुमत्वा तद्वचनम् । त्रिःप्रदक्षिणीकृत्य पुनरभिवन्दितः स मया भगवान् ।।७२।। गुजराती अनुवाद : आ प्रमाणे केवलीय कहे छते तेमनी वातनो। स्वीकार कटीने बहुमान पूर्वक मानीने त्रण प्रदक्षिणा की फटी थी तेमने वंदन कर्यु.
SR No.525094
Book TitleSramana 2015 10
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSundarshanlal Jain, Ashokkumar Singh
PublisherParshvanath Vidhyashram Varanasi
Publication Year2015
Total Pages170
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Sramana, & India
File Size15 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy