SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 156
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ कृति १५० : श्रमण, वर्ष ५७, अंक १/जनवरी-मार्च २००६ असाधारण मानव सेवा हेतु उल्लेखनीय योगदान प्रदान करने वाले महानुभावों को ‘महावीर अवार्ड' से पुरस्कृत करना है। फाउण्डेशन प्रतिवर्ष ५-५ लाख रुपये के तीन पुरस्कार उपरोक्त क्षेत्रों में कार्यरत उल्लेखनीय महानुभावों तथा संस्थानों को प्रदान करता रहा है। अब तक ५-५ लाख रुपये के ३३ पुरस्कारों से उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं, शिक्षाविदों-प्रसिद्ध चिकित्सकों तथा समाज एवं जनसेवियों को 'महावीर अवार्ड' से सम्मानित किया जा चुका है। "डॉ० नेमीचन्द जैन स्मृति पुरस्कार' के विजेता लेखक भाषा १. डॉ० कुसुम लूनिया हिन्दी शकाहार - श्रेष्ठ आहार बी-१००, सूर्या नगर, पोस्ट : चंदनगर, जिला : गाजियाबाद (उ०प्र०) २. डॉ० कल्याणमल गंगवाल अंग्रेजी शाकाहार - स्वस्थ जीवन ५८६, सदाशिव पेठ, की राह लक्ष्मी रोड, पूणे-४११०३० उपरोक्त विजेताओं का चयन १५ प्रतियोगियों एवं उन द्वारा आलेखित कृतियों (३ अंग्रेजी एवं १२ हिन्दी) में से निर्णायक मंडल - डॉ० श्री जयन्तिलाल जैन, डॉ० भद्रेश जैन तथा श्री दुलीचन्द जैन (संयोजक) ने किया। श्री चंचलमलजी चौरड़िया को मारवाड़ रत्न सम्मान महावीर इन्टरनेशनल जोधपुर के पूर्वाध्यक्ष एवं प्राणी मित्र संस्थान के कार्याध्यक्ष वीर चंचलमल चोरडिया को पाली मित्र मण्डल, मुम्बई द्वारा एक भव्य समारोह में 'मारवाड़ रत्न' से सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें ३१०००/- रु० की राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। इस सम्मान हेतु पाली मित्र मण्डल, मुम्बई द्वारा सम्पूर्ण मारवाड़ में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सेवाओं के लिये प्रतिवर्ष एक समाज सेवी का चयन किया जाता है। चौरड़ियाजी को यह सम्मान उनके द्वारा अहिंसात्मक स्वावलम्बी चिकित्सा पद्धतियों के क्षेत्र में प्रशिक्षण, उपचार, प्रचार-प्रसार एवं जन-जागरण के लिये राष्ट्रीय स्तर पर किये गये उल्लेखनीय सेवाओं हेतु प्रदान किया गया। इस अवसर पर चौरड़ियाजी द्वारा ३५० परिवारों को अपने ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित पुस्तकें १. मौलिक चिकित्सा कौनसी? २. भोजन और स्वास्थ्य, ३. आत्म वैभव आदि भेंट की गयीं। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.525057
Book TitleSramana 2006 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShreeprakash Pandey
PublisherParshvanath Vidhyashram Varanasi
Publication Year2006
Total Pages170
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Sramana, & India
File Size8 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy