SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 67
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ४०९ Jain Education International ___ अंक १ ई० सन् १९५४ . पृष्ठ । ६-८ ६ १९९१ ७१-७४ For Private & Personal Use Only श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक भद्रबाहु का कालमान मुनिश्री फूलचन्द जी भरतमुनि द्वारा प्राकृत को संस्कृत के साथ प्रदत्तसम्मान और गौरवपूर्ण स्थान डॉ० के०आर०चन्द्र भविसयत्तकहा तथा अपभ्रंश कथाकाव्य; कुछ - प्रतिस्थापनायें डॉ० देवेन्द्रकुमार जैन भारतीय आर्यभाषा और अपभ्रंश भारतीय आचार्यों की दृष्टि में काव्य के हेतु डॉ० गंगासागर राय भारतीय कथा साहित्य में पद्मचरित का स्थान श्री रमेशचन्द्र जैन भारतीय प्रतीक परम्परा में जैन साहित्य का योगदान डॉ० प्रेमचंद जैन भारतीय वाङ्मय में प्राकृत भाषा का महत्त्व पं० बेचरदास दोशी भारतीय साहित्य की रमणीय काव्य रचना : - गउडवहो डॉ० श्रीरंजन सूरिदेव भाषा और साहित्य श्री कन्हैयालाल सरावगी भाष्य और भाष्यकार श्री मोहनलाल मेहता मंगलकलशकथा श्री भँवरलाल नाहटा मल्लिषेण और उनकी स्याद्वादमंजरी डॉ० बशिष्ठनारायण सिन्हा १९७१ १९७६ १९६३ १९७३ १९७० १९६८ ६-११ ९-१२ २४-२७ ३-११ ३२-३७ ६-१६ २४ २१ a roa osor or x 9 w १९ २४ www.jainelibrary.org १९७३ १९७६ १९५५ १९६८ १९७५ ३-७ ३-१४ ४-१२ २६-३४ ३-६ १९ २६६
SR No.525035
Book TitleSramana 1998 10
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivprasad
PublisherParshvanath Vidhyashram Varanasi
Publication Year1998
Total Pages168
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Sramana, & India
File Size6 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy