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श्रमण : अतीत के झरोखे में
प्रवचनकार
९. विधि विज्ञान श्री कानजी स्वामी; संपा० श्री शशीकान्त म० सेठ, प्रकाशक- पूर्वोक्त; भावनगर वीरनिर्वाण सम्वत् २५१५ / ई० सन् १९८९; पृष्ठ ७६; आकार - डिमाई; मूल्य ३ रूपया ।
१०. अनुभव प्रकाश - लेखक- स्व० दीपचन्द जी कासलीवाल ; प्रकाशकपूर्वोक्त, भावनगर, वीरनिर्वाणसम्वत् २५२० / ई० सन् १९९३; पृष्ठ ८४; आकारडिमाई; मूल्य १० रूपया।
११. जिण सासणं सत्वं
प्रवचनकार
पूज्य श्री कानजी स्वामी; संपा०श्री शशिकान्त म० सेठ; प्रकाशक- पूर्वोक्त, भावनगर, वीरनिर्वाण सम्वत् २५१६ / ई० स० १९८९; आकार डिमाई; पृष्ठ १५२; मूल्य ८ रूपया ।
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१२. तत्त्वानुशीलन - लेखक- श्री शशीकान्त म० सेठ, प्रकाशक- पूर्वोक्त; भावनगर वीरनिर्वाण सम्वत् २५२४ / ई० स० १९९८ ई०; आकार - डिमाई; पृष्ठ १६१; मूल्य २० रूपये ।
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१३. दृव्यदृष्टि - प्रकाश (श्री निहालचंद सोगानी के पत्रों का संकलन एवं श्री कानजी स्वामी के प्रवचनों का संग्रह); प्रका०- पूर्वोक्त; प्रकाशन वर्ष - वीर निर्वाण सम्वत् २५१९ / ई० स० १९९२; आकार- डिमाई; पृष्ठ १९६; मूल्य १५ रूपया ।
१४. निर्भ्रात - दर्शन की पगडण्डी पर - लेखक - श्री शशीकान्त म० सेठ; अनुवादक - श्री रमेशचन्द्र सोगानी ; प्रकाशक - पूर्वोक्त, प्रकाशन वर्ष - वि० सं० २०५३ ; पृष्ठ ६०; मूल्य १० रूपया ।
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१५. धन्य अवतार (श्री चम्पाबहन के सम्बन्ध में श्री कानजी स्वामी के उद्गार); प्रकाशक- पूर्वोक्त, पृष्ठ ३८ ।
१६. मुमुक्षुता का आरोहणक्रम
विवेचक - श्री शशीकान्त म० सेठ; प्रका० पूर्वोक्त, प्रकाशन वर्ष १९८९ ई०, पृष्ठ १३६, मूल्य - १५ रूपये।
जैन जगत,
इन्दौर में आचार्यसम्राट श्री देवेन्द्रमुनि जी महाराज के सानिध्य में विविध आयोजन
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आचार्यसम्राट श्री देवेन्द्रमुनि जी महाराज के चातुर्मासार्थ विराजने से यहां पर धर्मकी अभूतपूर्व प्रभावना हुई। उनके दैनिक प्रवचन में देश के विभिन्न भागों से श्रद्धालुगण पहुंचे। दि० ६ अगस्त को आचार्यश्री ने श्री प्रेमसुख जी महाराज व ७ अगस्त को मरुधरकेशरी श्री मिश्रीमलजी महाराज के व्यक्तित्व व कृतित्व पर विस्तृत
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