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________________ जनविद्या-13 [ 35 प्रथम परिच्छेद 1.3 विषय धर्मपरीक्षा धम्मपरिक्खा (अमितगति) ___(हरिषेण) पूर्ववर्ती कवियों का उल्लेख 1.1-16 जम्बूद्वीप वर्णन 1.17-20 विजयाधपर्वत वर्णन 1.21.27 वैजयन्ती नगरी वर्णन 1.28-31 राजा जितशत्रुवर्णन 1.32-36 1.5 जितशत्रु की पत्नी वायुवेगा और 1.37-47 1.6-7 पुत्र मनोवेम मनोवेग का मित्र पवनवेग, प्रिया- 1.48-55 1.8,विजयापुरी पुरी का राजपुत्र, उसका जैन मन्दिर दर्शनार्थ गमव जंगल में मुनिदर्शन, 1.56-57 1.9 अवन्ति देश का बर्णव उज्जयिनी वर्णन 1.38-66 1.10-11 जैन मुनि से प्रश्न 1.67-70 1.12 द्वितीय परिच्छेद संसार-वर्णन, मधुविन्दु दृष्टान्त 2.1.21 धर्म का प्रभाव 2.22-89 1.13-14 कया में अन्तर 1.12 विस्तार कम है 1.16 मुनि से प्रश्न और उसका उत्तरे 2.90-95 तृतीय परिच्छेद मनोवेम-पवनवेम के बीच संवादे, मित्रता की विशेषताएं पाटलिपुत्र की विशेषताएं 1.11 3.1-26 3.27-43 1.18-20 कौतुक प्रदर्शन 2.1-3 3.44-68 दोनों कुमारों का रूपवर्णन, काव्यात्मक तत्व अधिक है शास्त्रार्थ विप्रगण का एकत्र होना पौर उनसे बाद 3.69-95 2.4-6
SR No.524761
Book TitleJain Vidya 13
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPravinchandra Jain & Others
PublisherJain Vidya Samsthan
Publication Year1993
Total Pages102
LanguageSanskrit, Prakrit, Hindi
ClassificationMagazine, India_Jain Vidya, & India
File Size8 MB
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