SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 109
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ११. अथ ब्यासी दिन गया पछी। चउदह सुपन त्रिसला देखतां। देवणंदा जाता देखतां । उत्तरफल्गुनी नक्षत्र कीधा छइ कल्याण जिणइ पांच । आचार्य करी छइ चरित्र जेहनउ। १२. लोक नइ विषय प्रसिद्ध जाति क्षत्रिय जाति । विख्यात य जाति जे सिद्धार्थ राजा तेहनी भार्या चेडाराय नी बेटी। त्रिसला क्षत्रियाणी नी कुक्षि नइ विषय । १३. इंद्र नइ आदेस इ हरिणेगमेषी देवता यइ। गर्भ नव विपर्यय करी नइ । आसोज वदि नी तेरस नी रात्रि नइ विषय तुं हे नाथ साहरिय उ संक्रमाण्यो। १४. क्षत्रियकुंड ग्राम नइ विषय जायउ चेत्रसुदि तेरसिनी आधी राति । काश्यप गोत्र छइ जेह नउ सुवर्ण वर्ण छइ जेहनी। कन्या रासि छइ जेहनी सीह अंक चिह्न छइ जेह नउ । १५. लोक नइ विषय चिंतामणि रत्न समान तुम्हे । अवतरय इथ कइ रत्न जन लोक धनधान्ये करी नइ थध्यउ-ज्ञातकुल ते भणी। वर्द्धमान नाम मा-बाप ना दीधा तु हुय उ प्रगट तुं। १६. जन्म मज्जन क्षणइ । जन्म महोत्सव इ ए बालक किम कलसां ना नीर सह स्पइ एहवउ इं इन उ कुविकल्प रूप खील उ उषा णिवसणी । जिण भगवंत मोट उ अवि पर्वत कंपायउ । ते भणी देवता ए महावीर नाम दीधउ । १७. २८ वरसे मा बाप परलोकि पहुंता पछी वडउ भाई नंदिवर्द्धन नइ वचनि आग्रह करी रह्य उ बिवरस सीम। गृहस्थावास इ निरवद्य वृत्ति सूझतउ आहार लेतउ । भाव चारतिया नी परि महामुनीश्वर नी परि। १८. सात हाथ देह छइ ऊंची जेहनी गृहस्थावास इ। रही नइ जीस ३० वरस सीम राज्य पदवी लीधी भोगवी। नव लोकांतिक देवता ए प्रेरयउ थकउ.... वरस सीम संवच्छरी दान देई नइ । १९. देवता ए राज ए कीधी छउ अनेके प्रकारे जल स्नान दीक्षाभिषेक देवता ना कीधा विलेपन तिण विलिप्त गात्र छइ जेह नउ। मनोहर अलंकार धरया छइ जिण इ । च्यार निकाय ना देवता तिण इ सहित । दिन प्रति । एक कोडि । आठ लाख । सोनहिया । मध्याह्न सीम दीजइ । वरसी दान । तीन सय कोडि । अठ्यासी कोडि । असी लाख । २०. चन्द्रप्रभा नाम सिबिका इं बइसीनइ, मगसिर मास नी दसमि वदि दिवइ चउप्पहरि, प्रधान वय इं दीक्षा लीधी जोवन वय इं, छठ तप कीधा हुंता ज्ञात खंद नाम वनइ। २१. करिनाम ग्राम नइ बाहिर । दीक्षा लीधी तेहिज रात्रि थइनइ वि आवइ सत्ये इंद्रइ उपसर्ग करता नइ वारइ गोवालिया नइ वीनती करइ । उपसर्ग रहित करूं हरेज्य उपसर्ग उपजता वारुं । २२. ते इंद्र नं वचन अमानीत इ तुं नइ निश्चयमति छइ जेहनी विचरत इ नइ २६६ तुलसी प्रज्ञा Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.524592
Book TitleTulsi Prajna 1997 07
Original Sutra AuthorN/A
AuthorParmeshwar Solanki
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year1997
Total Pages166
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Tulsi Prajna, & India
File Size7 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy